श्रीमद्भगवद्गीता

कर्तव्य और भक्ति का शाश्वत संवाद। ऑडियो पाठ, सरल अनुवाद और कृष्ण AI मार्गदर्शन के साथ भगवद्गीता का अनुभव करें।

18
अध्याय
700
श्लोक
Bilingual
अनुवाद
अध्याय १47 श्लोक

अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने गुरुजनों और संबंधियों से युद्ध करने की संभावना से व्याकुल होकर अर्जुन का शोक और शस्त्र-त्याग।

विषाद और भ्रमअध्याय प्रवेश
अध्याय २72 श्लोक

सांख्ययोग

भगवान कृष्ण द्वारा आत्मा की अमरता, क्षत्रिय धर्म के कर्तव्य और निष्काम कर्म योग के सिद्धांत का पहला उपदेश।

आत्मज्ञान और कर्म सिद्धांतअध्याय प्रवेश
अध्याय ३43 श्लोक

कर्मयोग

बिना फल की आसक्ति के अपने कर्तव्यों का पालन करना कैसे मोक्ष का मार्ग बनता है और संसार चक्र को चलाए रखता है, इसका वर्णन।

निष्काम कर्म योगअध्याय प्रवेश
अध्याय ४42 श्लोक

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

गीता का इतिहास, अवतारों का रहस्य, और कैसे ज्ञान की अग्नि समस्त कर्मों के बंधनों को भस्म कर देती है।

ज्ञान, कर्म और संन्यासअध्याय प्रवेश
अध्याय ५29 श्लोक

कर्मसंन्यासयोग

कर्म संन्यास और निष्काम कर्म योग की तुलना, और यह प्रतिपादन कि आंतरिक अनासक्ति ही परम शांति का मार्ग है।

कर्म संन्यास और योगअध्याय प्रवेश
अध्याय ६47 श्लोक

ध्यानयोग

मन को वश में करने, प्राणायाम, और अष्टांग योग साधना द्वारा चित्त को स्थिर करने की व्यावहारिक पद्धतियां।

ध्यान योग और आत्म-संयमअध्याय प्रवेश
अध्याय ७30 श्लोक

ज्ञानविज्ञानयोग

भगवान की अपरा (जड़) और परा (चेतन) प्रकृतियों का वर्णन, और शरणागति द्वारा दैवीय माया को पार करने का रहस्य।

ज्ञान और विज्ञान योगअध्याय प्रवेश
अध्याय ८28 श्लोक

अक्षरब्रह्मयोग

मृत्यु के समय प्राण-उत्सर्ग की विधि, सृष्टि के चक्र, और कभी नष्ट न होने वाले परम अक्षर धाम की प्राप्ति का मार्ग।

अक्षर ब्रह्म योगअध्याय प्रवेश
अध्याय ९34 श्लोक

राजविद्याराजगुह्ययोग

सबसे गुप्त और पावन ज्ञान: संपूर्ण सृष्टि में कृष्ण की व्यापकता और अनन्य प्रेममयी भक्ति की असीम महिमा।

परम गुह्य ज्ञानअध्याय प्रवेश
अध्याय १०42 श्लोक

विभूतियोग

कृष्ण अपने दिव्य ऐश्वर्यों और स्वरूपों का वर्णन करते हैं, यह बताते हुए कि सृष्टि का हर तेज और सौंदर्य उन्हीं का अंश है।

विभूति और ऐश्वर्यअध्याय प्रवेश
अध्याय ११55 श्लोक

विश्वरूपदर्शनयोग

अर्जुन को दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है और वह भगवान के अनंत, विस्मयकारी विश्वरूप का साक्षात्कार करता है जिसमें संपूर्ण काल समाहित है।

विश्वरूप दर्शन योगअध्याय प्रवेश
अध्याय १२20 श्लोक

भक्तियोग

एक आदर्श भक्त की सुंदर परिभाषा: निराकार और साकार उपासना का अंतर, और भगवान को अत्यंत प्रिय भक्तों के लक्षण।

भक्ति योगअध्याय प्रवेश
अध्याय १३35 श्लोक

क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

शरीर को 'क्षेत्र' (कर्मभूमि) और आत्मा/परमात्मा को 'क्षेत्रज्ञ' (जानने वाला) के रूप में विश्लेषित करने का ज्ञान।

प्रकृति, पुरुष और विवेकअध्याय प्रवेश
अध्याय १४27 श्लोक

गुणत्रयविभागयोग

सत्त्व (प्रकाश), रज (कर्म/तृष्णा), और तम (अज्ञान/आलस्य) गुण कैसे जीव को बांधते हैं, और इनसे परे गुणातीत होने की विधि।

प्रकृति के तीन गुणअध्याय प्रवेश
अध्याय १५20 श्लोक

पुरुषोत्तमयोग

संसार रूपी उल्टे अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष का रूपक, और क्षर तथा अक्षर से परे पुरुषोत्तम परमात्मा का साक्षात ज्ञान।

पुरुषोत्तम योगअध्याय प्रवेश
अध्याय १६24 श्लोक

दैवासुरसम्पद्विभागयोग

मुक्ति की ओर ले जाने वाले दैवीय गुणों (निर्भयता, सत्य) और पतन की ओर ले जाने वाले आसुरी विकारों (क्रोध, दंभ) का वर्गीकरण।

दैवी और आसुरी संपदाअध्याय प्रवेश
अध्याय १७28 श्लोक

श्रद्धात्रयविभागयोग

मनुष्य की रुचि, भोजन, दान, तप और यज्ञ का प्रकृति के तीन गुणों (सत्, रज, तम) के आधार पर त्रिविध विभाजन।

श्रद्धा के तीन भेदअध्याय प्रवेश
अध्याय १८78 श्लोक

मोक्षसंन्यासयोग

संपूर्ण गीता का सारांश उपदेश: त्याग, कर्तव्य की शुद्धता, और भगवान की शरण में जाने पर मिलने वाले परम मोक्ष का अंतिम आश्वासन।

मोक्ष संन्यास योगअध्याय प्रवेश