विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र

विष्णुजी

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विष्णुजी

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र

महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट भगवान विष्णु के १००० नामों का परम पावन संग्रह।

शुभ समय:एकादशी, गुरुवार
शुभ फल:सभी बाधाओं से मुक्ति, यश, सुख-समृद्धि और मोक्ष
◆ध्यान 1

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

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Śuklāmbaradharaṁ Viṣṇuṁ Śaśivarṇaṁ Caturbhujam | Prasannavadanaṁ Dhyāyēt Sarvavighnōpaśāntayē ||

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जिन्होंने श्वेत वस्त्र धारण किए हैं, जो सर्वव्यापी हैं, जिनका रंग चंद्रमा के समान धवल है, जिनकी चार भुजाएं हैं और जिनका मुख अत्यंत प्रसन्नचित्त है, उन श्रीहरि विष्णु का हम सभी विघ्नों के निवारण के लिए ध्यान करते हैं।

◆ध्यान 2

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

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Śāntākāraṁ Bhujagaśayanaṁ Padmanābhaṁ Surēśaṁ Viśvādhāraṁ Gaganasadṛśaṁ Mēghavarṇaṁ Śubhāṅgam | Lakṣmīkāntaṁ Kamalanayanaṁ Yōgibhirdhyānagamyaṁ Vandē Viṣṇuṁ Bhavabhayaharaṁ Sarvalōkaikanātham ||

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जिनका स्वरूप परम शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के स्वामी हैं, जो इस जगत के आधार हैं, आकाश की तरह अनंत हैं, मेघ के समान श्याम वर्ण हैं, जिनके अंग अत्यंत सुंदर हैं, जो माता लक्ष्मी के प्रिय हैं, कमल जैसी आँखों वाले हैं, योगियों द्वारा ध्यान में प्राप्त होने वाले हैं और जो संसार के जन्म-मृत्यु के भय का नाश करने वाले हैं, उन जगत के स्वामी श्री विष्णु को मैं नमन करता हूँ।

◉श्लोक 3

विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥

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Viṣṇurvaṣaṭkārō Bhūtabhavyabhavatprabhuḥ | Bhūtakṛdbhūtabhṛdbhāvō Bhūtātmā Bhūtabhāvanaḥ ||

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जो सर्वव्यापी हैं, यज्ञ के भोक्ता हैं, भूत-भविष्य और वर्तमान के स्वामी हैं, चराचर जगत के रचयिता हैं, सृष्टि के पोषक हैं, समस्त चराचर में व्याप्त हैं, सभी प्राणियों की अंतरात्मा हैं और समस्त जीवों का कल्याण सोचने वाले हैं।

◉श्लोक 4

पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः। अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥

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Pūtātmā Paramātmā Ca Muktānāṁ Paramā Gatiḥ | Avyayaḥ Puruṣaḥ Sākṣī Kṣētrajñō'kṣara Eva Ca ||

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जो परम पवित्र आत्मा हैं, समस्त ब्रह्मांड के परमात्मा हैं, मुक्त पुरुषों (ज्ञानियों) की परम गति हैं, अविनाशी पुरुष हैं, सृष्टि के साक्षी (देखने वाले) हैं, क्षेत्रज्ञ (शरीर को जानने वाले) हैं और जिनका कभी क्षय नहीं होता।

विष्णुजी
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ पूर्ण किया। विष्णुजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।