Purusha Suktam
Lord Vishnu
Purusha Suktam
A landmark Vedic hymn from the Rigveda, describing the cosmic body of the Supreme Being.
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद् दशाङ्गुलम्॥
Sahasraśīrṣā Puruṣaḥ Sahasrākṣaḥ Sahasrapāt | Sa Bhūmiṁ Viśvatō Vṛtvā Atyatiṣṭhad Daśāṅgulam ||
वे परम पुरुष (विश्वरूप परमात्मा) हज़ारों सिरों वाले, हज़ारों आँखों वाले और हज़ारों पैरों वाले हैं। उन्होंने संपूर्ण ब्रह्मांड को सब ओर से व्याप्त करके भी दस अंगुल ऊपर अंतरिक्ष में अपनी सत्ता रखी है।
पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्। उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति॥
Puruṣa Evēdaṁ Sarvaṁ Yadbhūtaṁ Yacca Bhavyam | Utāmṛtatvasyēśānō Yadannēnātirohati ||
यह सब कुछ (चराचर जगत) वे परम पुरुष ही हैं, जो पहले हो चुका है और जो आगे होने वाला है। वे अमरता के स्वामी (ईश्वर) हैं और अन्न से बढ़ने वाले सभी जीवों के भी नियामक हैं।
एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पुरुषः। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥
Etāvānasya Mahimātō Jyāyānśca Pūruṣaḥ | Pādō'sya Viśvā Bhūtāni Tripādasyāmṛtaṁ Divi ||
यह दृश्यमान ब्रह्मांड तो इनकी महिमा का एक छोटा सा अंश मात्र है। वे परम पुरुष इस सृष्टि से भी अत्यंत महान हैं। ब्रह्मांड के समस्त प्राणी इनका केवल एक चौथाई भाग हैं, जबकि इनका शेष तीन-चौथाई भाग अविनाशी और दिव्य लोक में स्थित है।
तस्माद्विराळजायत विराजो अधि पुरुषः। स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः॥
Tasmādvirāḷajāyata Virājō Adhi Pūruṣaḥ | Sa Jātō Atyaricyata Paścādbhūmimathō Puraḥ ||
उन आदि पुरुष से ही विराट ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। विराट देह में पुनः पुरुष (जीवात्मा रूप) प्रकट हुए। वे उत्पन्न होकर संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हो गए और फिर उन्होंने पृथ्वी तथा जीवों के शरीर की रचना की।
Recitation Completed
You have completed the Purusha Suktam. May the blessings of Lord Vishnu always be with you.