सूर्य अष्टकम्

सूर्यदेव

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सूर्यदेव

सूर्य अष्टकम्

आठ श्लोकों का सूर्य देव का स्तुति संग्रह जो नेत्र ज्योति और आरोग्यता (अच्छा स्वास्थ्य) प्रदान करता है।

शुभ समय:रविवार, सुबह
शुभ फल:नेत्र ज्योति, आरोग्यता, मान-सम्मान की प्राप्ति
◉श्लोक 1

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

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Ādidēva Namastubhyaṁ Prasīda Mama Bhāskara | Divākara Namastubhyaṁ Prabhākara Namō'stu Tē ||

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हे आदिदेव! आपको नमस्कार है। हे भास्कर (प्रकाश करने वाले)! मुझ पर प्रसन्न होइए। हे दिवाकर! आपको नमस्कार है। हे प्रभाकर! आपको नमन है।

◉श्लोक 2

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्। श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम्॥

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Saptāśvarathamārūḍhaṁ Pracaṇḍaṁ Kaśyapātmajam | Śvētapadmadharaṁ Dēvaṁ Taṁ Sūrya Praṇamāmyaham ||

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जो सात घोड़ों वाले रथ पर सवार हैं, परम तेजस्वी हैं, महर्षि कश्यप के पुत्र हैं और अपने हाथों में श्वेत (सफेद) कमल धारण करते हैं, उन सूर्य देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

◉श्लोक 3

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्। महापापहरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम्॥

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Lōhitaṁ Rathamārūḍhaṁ Sarvalōkapitāmaham | Mahāpāpaharaṁ Dēvaṁ Taṁ Sūrya Praṇamāmyaham ||

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जो लाल रंग के रथ पर आरूढ़ हैं, सभी लोकों के पितामह (रक्षक) हैं और बड़े से बड़े पापों का नाश करने वाले हैं, उन सूर्य नारायण को मैं प्रणाम करता हूँ।

◉श्लोक 4

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्माविष्णुमहेश्वरम्। महापापहरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम्॥

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Traiguṇyaṁ Ca Mahāśūraṁ Brahmāviṣṇumahēśvaram | Mahāpāpaharaṁ Dēvaṁ Taṁ Sūrya Praṇamāmyaham ||

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जो तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) से युक्त हैं, परम पराक्रमी हैं, और स्वयं ब्रह्मा, विष्णु व महेश स्वरूप हैं, उन पाप नाशक सूर्य देव को मैं नमन करता हूँ।

सूर्यदेव
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने सूर्य अष्टकम् का पाठ पूर्ण किया। सूर्यदेव की कृपा आप पर सदा बनी रहे।