शिव अष्टकम्

शिवजी

18
शिवजी

शिव अष्टकम्

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिव अष्टकम् भगवान शिव के रूप, गुणों और उनके परम शांत स्वभाव की महिमा गाता है।

शुभ समय:सोमवार
शुभ फल:कल्याण, मानसिक शांति, पापनाश
◉श्लोक 1

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं सदानन्द भाजाम्। भवद्भव्य भूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शम्भु मीशान मीडे॥

•

Prabhuṁ Prāṇanāthaṁ Vibhuṁ Viśvanāthaṁ Jagannātha Nāthaṁ Sadānanda Bhājām | Bhavadbhavya Bhūtēśvaraṁ Bhūtanāthaṁ Śivaṁ Śaṅkaraṁ Śambhu Mīśāna Mīḍē ||

💡

जो सभी के स्वामी हैं, प्राणों के स्वामी हैं, सर्वव्यापी हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं, और भक्तों को सदा आनंद देने वाले हैं; जो भूत, भविष्य और वर्तमान के स्वामी हैं, मैं उन कल्याणकारी, शंभु, शंकर और समर्थ शिव की स्तुति करता हूँ।

◉श्लोक 2

गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकाल कालं गणैश्चापि पालम्। जटाजूट गङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं शिवं शङ्करं शम्भु मीशान मीडे॥

•

Galē Ruṇḍamālaṁ Tanau Sarpajālaṁ Mahākāla Kālaṁ Gaṇaiścāpi Pālam | Jaṭājūṭa Gaṅgōttaraṅgairviśālaṁ Śivaṁ Śaṅkaraṁ Śambhu Mīśāna Mīḍē ||

💡

जिनके गले में मुंडों की माला है, शरीर पर सर्पों का जाल लिपटा है, जो महाकाल के भी काल हैं, गणों के रक्षक हैं और जिनकी विशाल जटाओं में गंगा की तरंगें उठ रही हैं, उन परमेश्वर शिव की मैं स्तुति करता हूँ।

◉श्लोक 3

मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महामन्दमन्दं हसन्तं प्रफुल्लम्। हरं रुद्रमुण्डं विमुण्डं धरन्तं शिवं शङ्करं शम्भु मीशान मीडे॥

•

Mudāmākaraṁ Maṇḍanaṁ Maṇḍayantaṁ Mahāmandamandaṁ Hasantaṁ Prafullam | Haraṁ Rudramuṇḍaṁ Vimuṇḍaṁ Dharantaṁ Śivaṁ Śaṅkaraṁ Śambhu Mīśāna Mīḍē ||

💡

जो आनंद की खान हैं, जो आभूषणों के भी आभूषण हैं, जो मन्द-मन्द मुस्कुराते हैं, जो खिले हुए कमल के समान हैं, जो शत्रुओं के शीश काटते हैं और संहारक रुद्र रूप हैं, उन भगवान शंकर की मैं स्तुति करता हूँ।

◉श्लोक 4

जटाकलापशोभितं महाप्रकाशभासितं मनोरथांतरस्थितं महापापहारकम्। गिरीशजापतिं विभुं महेश शम्भु रूपकम् शिवं शङ्करं शम्भु मीशान मीडे॥

•

Jaṭākalāpaśōbhitaṁ Mahāprakāśabhāsitaṁ Manōrathāntarasthitaṁ Mahāpāpahārakam | Girīśajāpatiṁ Vibhuṁ Mahēśa Śambhu Rūpakam Śivaṁ Śaṅkaraṁ Śambhu Mīśāna Mīḍē ||

💡

जो सुंदर जटाओं के समूह से सुशोभित हैं, महातेज से प्रकाशमान हैं, भक्तों के मनोरथ पूरे करने वाले हैं, महापापों का हरण करने वाले हैं, माता पार्वती के पति हैं, और जो सर्वव्यापी महेश रूप हैं, उन भगवान शिव की मैं स्तुति करता हूँ।

शिवजी
✦✦✦

स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने शिव अष्टकम् का पाठ पूर्ण किया। शिवजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।