Ram Raksha Stotra
Lord Rama
Ram Raksha Stotra
A divine protective armor (Kavach) dedicated to Lord Rama, composed by Sage Budha Kaushika.
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥
Caritaṁ Raghunāthasya Śatakōtipravistaram | Ekaikam-Akṣaraṁ Punsāṁ Mahāpātakanāśanam ||
भगवान श्री रघुनाथ जी का चरित्र १०० करोड़ श्लोकों में फैला हुआ है। उसका एक-एक अक्षर भी मनुष्यों के बड़े से बड़े पापों का नाश करने वाला है।
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्। जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्॥
Dhyātvā Nīlōtpalaśyāmaṁ Rāmaṁ Rājīvalōcanam | Jānakīlakṣmaṇōpētaṁ Jaṭāmukuṭamaṇḍitam ||
नीले कमल के समान श्याम वर्ण वाले, कमल जैसे नेत्रों वाले, जटाओं का मुकुट धारण किए हुए, और जानकी (सीताजी) तथा लक्ष्मण जी के साथ सुशोभित श्री राम का ध्यान करके—
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः। कौसल्यायेदृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती॥
Śirō Mē Rāghavaḥ Pātu Bhālaṁ Daśarathātmajaḥ | Kausalyāyēdṛśau Pātu Viśvāmitrapriyaḥ Śrutī ||
रघुकुल के नायक श्री राम मेरे सिर की रक्षा करें, महाराज दशरथ के पुत्र मेरे मस्तक (माथे) की रक्षा करें, माता कौशल्या के नंदन मेरी आँखों की रक्षा करें और विश्वामित्र के प्रिय राम मेरे कानों की रक्षा करें।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः। जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः॥
Ghrāṇaṁ Pātu Makhatrātā Mukhaṁ Saumitrivatsalaḥ | Jihvāṁ Vidyānidhiḥ Pātu Kaṇṭhaṁ Bharatavanditaḥ ||
यज्ञों के रक्षक राम मेरे नाक की रक्षा करें, लक्ष्मण के स्नेहपात्र रामचंद्र मेरे मुख की रक्षा करें, ज्ञान की खान राम मेरी जीभ की रक्षा करें और भरत द्वारा पूजित प्रभु मेरे कंठ (गले) की रक्षा करें।
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥
Rāmēti Rāmabhadrēti Rāmacandrēti Vā Smaran | Narō Na Lipyatē Pāpairbhuktiṁ Muktiṁ Ca Vindati ||
जो भी मनुष्य 'राम', 'रामभद्र', 'रामचंद्र' इन दिव्य नामों का स्मरण करता है, वह पापों से लिप्त नहीं होता और इस जीवन में सुख (भोग) तथा अंत में मोक्ष प्राप्त करता है।
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