श्री महालक्ष्मी स्तोत्र

लक्ष्मीजी

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लक्ष्मीजी

श्री महालक्ष्मी स्तोत्र

विष्णु पुराण में वर्णित इंद्रदेव द्वारा रचित महालक्ष्मी स्तोत्र, जो दरिद्रता का नाश कर गृह में सुख और ऐश्वर्य का संचार करता है।

शुभ समय:शुक्रवार, लक्ष्मी पूजन
शुभ फल:दरिद्रता का नाश, सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति
◉श्लोक 1

नमस्ये सर्वलोकानां जननीं कमलजां शुभाम्। विष्णुवक्षःस्थलां देवीं माधवीं माधवप्रियाम्॥

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Namasyē Sarvalōkānāṁ Jananīṁ Kamalajāṁ Śubhām | Viṣṇuvakṣaḥsthalāṁ Dēvīṁ Mādhavīṁ Mādhavapriyām ||

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सभी लोकों की माता, कमल से उत्पन्न होने वाली, कल्याणकारी, भगवान विष्णु के वक्षःस्थल (हृदय) पर निवास करने वाली और माधव (कृष्ण) की परम प्रिय देवी लक्ष्मी को मैं नमस्कार करता हूँ।

◉श्लोक 2

न्यूनं त्वया विना देवि न किञ्चिदपि शोभते। यथा त्वया जगत्स्रष्टा दृश्यते विष्णुनावृतः॥

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Nyūnaṁ Tvayā Vinā Dēvi Na Kiñcidapi Śōbhatē | Yathā Tvayā Jagatsraṣṭā Dṛśyatē Viṣṇunāvṛtaḥ ||

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हे देवी! आपके बिना इस जगत में कुछ भी सुंदर या शोभनीय नहीं लगता। आपके साथ मिलकर ही भगवान विष्णु इस सृष्टि की रचना और पालन करते हैं।

◉श्लोक 3

त्वं श्रीस्त्वमीश्वरी देवि त्वं बुद्धिस्त्वं वसुन्धरा। त्वं पुष्टिस्त्वं मतिः श्रद्धा त्वं स्वाहा त्वं स्वधा तथा॥

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Tvaṁ Śrīstvaṁ-Īśvarī Dēvi Tvaṁ Buddhistvaṁ Vasundharā | Tvaṁ Puṣṭistvaṁ Matiḥ Śraddhā Tvaṁ Svāhā Tvaṁ Svadhā Tathā ||

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आप ही श्री हैं, आप ही ईश्वरी (स्वामिनी) हैं, आप ही बुद्धि, पृथ्वी, पुष्टि, मति (विचार), श्रद्धा, स्वाहा और स्वधा हैं।

◉श्लोक 4

एवं स्तुता तदा देवी देवेन्द्रेण महामुने। प्रसन्ना च ददौ देवाञ्छ्रियं चैव सनातनीम्॥

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Evaṁ Stutā Tadā Dēvī Dēvēndrēṇa Mahāmunē | Prasannā Ca Dadau Dēvānchriyaṁ Caiva Sanātanīm ||

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हे महामुने! जब देवराज इंद्र ने देवी लक्ष्मी की इस प्रकार स्तुति की, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने देवताओं को उनका खोया हुआ ऐश्वर्य और सनातन सुख पुनः प्रदान किया।

लक्ष्मीजी
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ पूर्ण किया। लक्ष्मीजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।