श्री कृष्ण अष्टकम्

कृष्णजी

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कृष्णजी

श्री कृष्ण अष्टकम्

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री कृष्ण अष्टकम् जगतगुरु भगवान कृष्ण के बाल रूप और उनकी लीलाओं का मधुर वर्णन है।

शुभ समय:बुधवार, जन्माष्टमी
शुभ फल:भक्ति, प्रेम, मन की शांति, मानसिक कष्टों का निवारण
◉श्लोक 1

भजे व्रजैक मण्डनं समस्त पाप खण्डनम् स्वभक्त चित्त रञ्जनं सदैव नन्द नन्दनम्। सुपिच्छ गुच्छ मस्तकं सुनाद वेणु हस्तकम् अनङ्ग रङ्ग सागरं नमामि कृष्ण नागरम्॥

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Bhajē Vrajaika Maṇḍanaṁ Samasta Pāpa Khaṇḍanam Svabhakta Citta Rañjanaṁ Sadaiva Nanda Nandanam | Supiccha Guccha Mastakaṁ Sunāda Vēṇu Hastakam Anaṅga Raṅga Sāgaraṁ Namāmi Kṛṣṇa Nāgaram ||

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जो ब्रजभूमि के आभूषण हैं, समस्त पापों को नष्ट करने वाले हैं, अपने भक्तों के मन को प्रसन्न करने वाले हैं और नंदजी के लाडले हैं; जिन्होंने सिर पर मोरपंख सजाया है और हाथों में बांसुरी धारण की है, उन चतुर श्री कृष्ण को मैं नमन करता हूँ।

◉श्लोक 2

मनोज गर्व मोचनं विशाल लोल लोचनम् विधूत गोप शोचनं नमामि पद्म लोचनम्। करारविन्द भूधरणं स्मितावलोक सुन्दरम् महेन्द्र मान दारणं नमामि कृष्ण वारणम्॥

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Manōj Garva Mōcanaṁ Viśāla Lōla Lōcanam | Vidhūta Gōpa Śōcanaṁ Namāmi Padma Lōcanam || Karāravinda Bhūdharaṇaṁ Smitāvalōka Sundaram | Mahēndra Māna Dāraṇaṁ Namāmi Kṛṣṇa Vāraṇam ||

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जो कामदेव के भी अभिमान को चूर करने वाले हैं, जिनकी बड़ी-बड़ी चंचल आँखें हैं, जो ग्वालों के कष्टों को हरने वाले हैं, जिन्होंने अपने हाथ की कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था और देवराज इंद्र के घमंड को तोड़ा था, उन भगवान कृष्ण को मैं नमन करता हूँ।

◉श्लोक 3

कदम्ब सून कुण्डलं सुचारु गण्ड मण्डलम् व्रजै क मोद दायकं नमामि कीर्ति नायकम्। यशोदया समोद मन्द सस्मितं मुखाम्बुजं परं गुणाकरं भजे नमामि कृष्ण नायकम्॥

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Kadamba Sūna Kuṇḍalaṁ Sucāru Gaṇḍa Maṇḍalam | Vrajai Ka Mōda Dāyakaṁ Namāmi Kīrti Nāyakam || Yaśōdayā Samōda Manda Sasmitam Mukhāmbujaṁ | Paraṁ Guṇākaraṁ Bhajē Namāmi Kṛṣṇa Nāyakam ||

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जो कानों में कदम्ब के फूलों के कुंडल पहनते हैं, जिनके गाल अत्यंत सुंदर हैं, जो ब्रज के लोगों को आनंद देने वाले हैं और कीर्ति (राधाजी) के नायक हैं; यशोदा मैया को आनंदित करने वाले मुस्कुराते मुख वाले, गुणों की खान श्री कृष्ण को मैं भजता हूँ।

◉श्लोक 4

नवीन जीमूत प्रकाशमुल्लसद्विशालकुन्तलं अनेकरत्नदीप्तिमत्किरीटकीर्णकुन्तलम्। प्रफुल्लपद्मलोचनं सुचारुहाससद्युतिं नमामि नन्दकुमारकं सदा विपद्विमोचनम्॥

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Navīna Jīmūta Prakāśam-Ullasadviśālakuntalaṁ | Anēkaratnadīptimat-Kirīṭakīrṇakuntalam || Prafullapadmalōcanaṁ Sucāruhāsasadyutiṁ | Namāmi Nandakumārakaṁ Sadā Vipad-Vimōcanam ||

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नवीन श्याम मेघ के समान सुंदर वर्ण वाले, जिनके सुंदर लंबे बाल हैं, जो रत्नों से जड़े मुकुट धारण करते हैं, खिले हुए कमल जैसी आँखों वाले और मधुर मुस्कान वाले, सदा विपत्तियों से छुड़ाने वाले नंदलाल को मैं नमन करता हूँ।

कृष्णजी
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री कृष्ण अष्टकम् का पाठ पूर्ण किया। कृष्णजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।