हनुमान बाहुक

हनुमानजी

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हनुमानजी

हनुमान बाहुक

तुलसीदास जी द्वारा बाहु (हाथ) की भयंकर पीड़ा के निवारण के लिए रचित हनुमान बाहुक शारीरिक रोगों और कष्टों का नाश करता है।

शुभ समय:मंगलवार, शनिवार
शुभ फल:शारीरिक पीड़ा, घोर व्याधियों और रोगों का नाश
◉श्लोक 1

सिंधु तरन, कपि बीर, दनुज-बन-दहन, महारन। लंक दहन, दसकंठ-कँपायन, संताप-हरन॥ पवनपुत्र, अंजनी-सुवन, केसरी-नंदन, राम-दूत। देहु मोही बल, बुधि, बिद्या, संताप हरहु कपि-दूत॥

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Sindhu taran, kapi beer, danuj-ban-dahan, maharan | Lank dahan, dasakanth-kanpayan, santap-haran || Pavanaputra, anjani-suvan, kesari-nandan, ram-doot | Dehu mohi bal, budhi, bidya, santap harahu kapi-doot ||

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समुद्र पार करने वाले, असुरों के वन को जलाने वाले, लंका दहन करने वाले, रावण को कँपाने वाले और सभी संतापों को हरने वाले हे पवनपुत्र अंजनीनंदन! मुझे बल, बुद्धि, विद्या दें और मेरे सारे शारीरिक कष्टों को दूर करें।

◉श्लोक 2

बाहुक सुजस तिहूँ लोक गावैं। संताप-बिपति पल में मिटावैं॥ तुलसीदास प्रभु सरन तिहारी। हरहु पीर मोहिं कष्ट निवारी॥

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Bahuk sujas tihun lok gaavein | Santap-bipati pal mein mitaavein || Tulsidas prabhu saran tihari | Harahu peer mohin kasht nivari ||

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हनुमान बाहुक का सुंदर यश तीनों लोकों में गाया जाता है। यह समस्त शारीरिक कष्टों और विपत्तियों को क्षणभर में मिटा देता है। तुलसीदास जी कहते हैं—हे प्रभु हनुमानजी! मैं आपकी शरण में हूँ, मेरी बाहु पीड़ा को हरें और कष्टों का निवारण करें।

◉श्लोक 3

मम तन पीर हरहु हनुमाना। तुम सम बीर न जग में आना॥ राम काज कीन्हे तुम सारे। संकट मोचन नाम तिहारे॥

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Mam tan peer harahu Hanumana | Tum sam beer na jag mein aana || Ram kaaj keenhe tum saare | Sankat mochan naam tihaare ||

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हे हनुमानजी! मेरे शरीर के रोगों को हर लीजिए। आपके जैसा वीर इस संसार में कोई दूसरा नहीं है। आपने प्रभु श्रीराम के समस्त कार्यों को सिद्ध किया, इसी कारण आपका नाम संकटमोचन पड़ा।

◉श्लोक 4

अंजनी-गर्भ-संभूत कपीन्द्र सचिवोत्तम। शारीरिकं पीरं मम नाशय नाशय अंजनीसुत॥

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Anjanī-Garbha-Sambhūta Kapīndra Sacivōttama | Śārīrikaṁ Pīraṁ Mama Nāśaya Nāśaya Anjanīsuta ||

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माता अंजनी के गर्भ से उत्पन्न, वानरों के राजा और सुग्रीव के श्रेष्ठ मंत्री हे पवनपुत्र हनुमान! मेरे शरीर के समस्त कष्टों और पीड़ा को नष्ट करें, नष्ट करें।

हनुमानजी
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने हनुमान बाहुक का पाठ पूर्ण किया। हनुमानजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।