Ganesh Atharvashirsha
Lord Ganesha
Ganesh Atharvashirsha
An ancient Upanishadic hymn dedicated to Lord Ganesha, defining Him as the supreme absolute reality.
ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥
Om Namastē Gaṇapatayē | Tvamēva Pratyakṣaṁ Tattvamasi | Tvamēva Kēvalaṁ Kartā'si | Tvamēva Kēvalaṁ Dhartā'si | Tvamēva Kēvalaṁ Hartā'si | Tvamēva Sarvaṁ Khalvidaṁ Brahmāsi | Tvaṁ Sākṣādātmā'si Nityam ||
हे गणपति! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्त्व (मूल सत्य) हैं। आप ही ब्रह्मांड के एकमात्र कर्ता (रचनाकार), धर्ता (पालक) और हर्ता (संहारक) हैं। आप ही वास्तव में सर्वव्यापी ब्रह्म हैं और साक्षात् नित्य आत्मा हैं।
ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि। अव त्वं माम्। अव वक्तारम्। अव श्रोतारम्। अव दातारम्। अव धातारम्। अवानूचानमव शिष्यम्। अव पश्चात्तात्। अव पुरस्तात्। अवोत्तरात्तात्। अव दक्षिणात्तात्। अव चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्। सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्॥
Ṛtaṁ Vacmi | Satyaṁ Vacmi | Ava Tvaṁ Mām | Ava Vaktāram | Ava Śrōtāram | Ava Dātāram | Ava Dhātāram | Avānūcānam-Ava Śiṣyam | Ava Paścāttāt | Ava Purastāt | Avōttarāttāt | Ava Dakṣiṇāttāt | Ava Cōrdhvāttāt | Avādharāttāt | Sarvatō Māṁ Pāhi Pāhi Samantāt ||
मैं धर्मसम्मत और सत्य वचन कहता हूँ। हे गणपति! आप मेरी रक्षा करें, प्रवचनकर्ता की रक्षा करें, सुनने वाले की रक्षा करें, दान देने वाले की, गुरु की और शिष्य की रक्षा करें। मेरी पीछे से, आगे से, उत्तर दिशा से, दक्षिण दिशा से, ऊपर से तथा नीचे से रक्षा करें। सब ओर से मेरी रक्षा करें।
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः। त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः। त्वं सच्चिदानन्दाद्वितीयोऽसि। त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि॥
Tvaṁ Vāṅmayastvaṁ Cinmayaḥ | Tvam-Ānandamayastvaṁ Brahmamayaḥ | Tvaṁ Saccidānandā-Dvitīyō'si | Tvaṁ Pratyakṣaṁ Brahmāsi | Tvaṁ Jñānamayō Vijñānamayō'si ||
आप वाङ्मय (वाणी स्वरूप) और चिन्मय (चेतन रूप) हैं। आप आनंदमय और ब्रह्ममय हैं। आप अद्वितीय सच्चिदानन्द (सत्य-चित्त-आनंद) स्वरूप हैं। आप प्रत्यक्ष रूप में साक्षात् ब्रह्म हैं। आप ज्ञान और विज्ञान (परम अनुभव) से युक्त हैं।
एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
Ēkadantāya Vidmahē Vakratuṇḍāya Dhīmahi | Tannō Dantiḥ Pracōdayāt ||
हम एक दाँत वाले विघ्नराज को जानते हैं और टेढ़े मुख वाले श्री गणेश का ध्यान करते हैं। वे गजमुख प्रभु हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें (गणेश गायत्री)।
Recitation Completed
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