देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र

आदिशक्ति

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आदिशक्ति

देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित स्तोत्र जिसमें भक्त देवी माँ से अपनी अज्ञानता और भूलों के लिए क्षमा याचना करता है।

शुभ समय:नवरात्रि, दैनिक पूजा समाप्ति
शुभ फल:भूल-चूक के लिए क्षमा, देवी माँ का स्नेहमयी आशीर्वाद
◉श्लोक 1

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥

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Na Mantraṁ Nō Yantraṁ Tadapi Ca Na Jānē Stutimahō Na Cāhvānaṁ Dhyānaṁ Tadapi Ca Na Jānē Stutikathāḥ | Na Jānē Mudrāstē Tadapi Ca Na Jānē Vilapanaṁ Paraṁ Jānē Mātastvadanusaraṇaṁ Klēśaharaṇam ||

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हे माता! मैं न तो मंत्र जानता हूँ, न यंत्र, न ही मुझे स्तुति करनी आती है। मुझे न बुलाना आता है और न ही ध्यान करना। मैं कोई मुद्रा या रो-रोकर कष्ट कहना भी नहीं जानता, पर मैं इतना अवश्य जानता हूँ कि आपकी शरण में आना ही सभी कष्टों का अंत है।

◉श्लोक 2

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्याच्युतिरभूत्। तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥

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Vidherajñānēna Draviṇavirahēṇālasatayā Vidheyāśakyatvāt-Tava Caraṇayōryācyutirabhūt | Tadētat-Kṣantavyaṁ Janani Sakalōddhāriṇi Śivē Kuputrō Jāyēta Kvacidapi Kumātā Na Bhavati ||

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पूजा विधि न जानने के कारण, धन की कमी के कारण, आलस्य के कारण, या फिर सामर्थ्य से बाहर होने के कारण आपके चरणों की सेवा में जो कमी या भूल हुई हो, हे सर्वकल्याणकारी उद्धारिणी माता! उसे क्षमा करें। पुत्र कुपुत्र (बुरा पुत्र) हो सकता है, परंतु माता कभी कुमाता (बुरी माता) नहीं होती।

◉श्लोक 3

जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि। अपराधपरम्परापरं न हि माता समुपेक्षते सुतम्॥

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Jagadamba Vicitram-Atra Kiṁ Paripūrṇā Karuṇāsti Cēnmayi | Aparādhaparamparāparaṁ Na Hi Mātā Samupēkṣatē Sutam ||

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हे जगतमाता! यदि आप मुझ पर अपनी पूर्ण कृपा बरसाती हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि बच्चा चाहे जितने भी अपराध करे, माता कभी अपने पुत्र का त्याग नहीं करती।

◉श्लोक 4

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपतिः। कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम्॥

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Citābhasmālēpō Garalam-Aśanaṁ Dikpaṭadharō Jaṭādhārī Kaṇṭhē Bhujagapatihārī Paśupatiḥ | Kapālī Bhūtēśō Bhajati Jagadīśaikapadavīṁ Bhavāni Tvatpāṇigrahaṇaparipāṭīphalam-Idam ||

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जो चिता की भस्म लगाते हैं, विष खाते हैं, दिशाओं को ही वस्त्र रूप में ओढ़ते हैं, जटाधारी हैं, गले में नागराज धारण करते हैं, हाथ में कपाल लिए भूतों के स्वामी हैं, ऐसे भगवान शिव भी आज जगत के स्वामी (जगदीश) कहलाते हैं। हे भवानी! यह केवल आपसे विवाह करने की विधि का ही फल है।

आदिशक्ति
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ पूर्ण किया। आदिशक्ति की कृपा आप पर सदा बनी रहे।