अच्युतं केशवं रामनारायणं

कृष्णजी

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कृष्णजी

अच्युतं केशवं रामनारायणं

भगवान विष्णु और उनके अवतारों (राम और कृष्ण) के मधुर नामों का स्मरण कराने वाला एक अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी भक्ति गीत।

शुभ समय:एकादशी, संध्या आरती
शुभ फल:मोक्ष, भगवान की समीपता, भक्ति की प्राप्ति
◉श्लोक 1

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥

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Acyutaṁ Kēśavaṁ Rāmanārāyaṇāṁ Kṛṣṇadāmōdaraṁ Vāsudēvaṁ Harim | Śrīdharaṁ Mādhavaṁ Gōpikāvallabhaṁ Jānakīnāyakaṁ Rāmacandraṁ Bhajē ||

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अच्युत (कभी न गिरने वाले), केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर (लक्ष्मीपति), माधव, गोपियों के प्रिय और जानकी के स्वामी रामचंद्र जी का मैं भजन करता हूँ।

◉श्लोक 2

अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्। इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे॥

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Acyutaṁ Kēśavaṁ Satyabhāmādhavāṁ Mādhavaṁ Śrīdharaṁ Rādhikārādhitam | Indirāmandiraṁ Cētasā Sundaraṁ Dēvakīnandanaṁ Nandajaṁ Sandhadhē ||

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अच्युत, केशव, सत्यभामा के स्वामी, माधव, श्रीधर, राधाजी द्वारा पूजित, इंदिरा (लक्ष्मी) के निवास स्थान, मन से परम सुंदर, देवकी के पुत्र और नंद के लाल का मैं हृदय में ध्यान करता हूँ।

◉श्लोक 3

विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजायिने। वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः॥

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Viṣṇavē Jiṣṇavē Śaṅkhinē Cakriṇē Rukmiṇīrāgiṇē Jānakījāyine | Vallavīvallabhāyārcitāyātmanē Kansavidhvansinē Vanśinē Tē Namaḥ ||

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विष्णु रूप, सदा विजयी रहने वाले, शंख और चक्र धारण करने वाले, रुक्मिणी के प्रिय, सीताजी के पति, गोपियों के वल्लभ (स्वामी), पूजनीय, कंस का संहार करने वाले और बांसुरी बजाने वाले आपको मेरा नमन है।

◉श्लोक 4

कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक॥

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Kṛṣṇa Gōvinda Hē Rāma Nārāyaṇa Śrīpatē Vāsudēvājiṭa Śrīnidhē | Acyutānanta Hē Mādhavādhōkṣaja Dvārakānāyaka Draupadīrakṣaka ||

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हे कृष्ण! हे गोविन्द! हे राम! हे नारायण! हे लक्ष्मीपति! हे वासुदेव! हे अपराजित! हे श्रीनिधि! हे अच्युत! हे अनन्त! हे माधव! हे इंद्रियों से परे अधोक्षज! हे द्वारका के राजा! हे द्रौपदी की लाज बचाने वाले प्रभु!

◉श्लोक 5

राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणः। लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितो रामचन्द्रो विधातु सदा मङ्गलम्॥

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Rākṣasakṣōbhitaḥ Sītayā Śōbhitō Daṇḍakāraṇyabhūpuṇyatākāraṇaḥ | Lakṣmaṇēnānvitō Vānaraiḥ Sēvitō Rāmacandrō Vidhātu Sadā Maṅgalam ||

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असुरों को भयभीत करने वाले, माता सीता से सुशोभित होने वाले, दण्डकारण्य वन की भूमि को पवित्र करने वाले, भाई लक्ष्मण के साथ रहने वाले और वानरों द्वारा पूजित रामचंद्र जी सदा हमारा मंगल करें।

कृष्णजी
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स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण

आपने अच्युतं केशवं रामनारायणं का पाठ पूर्ण किया। कृष्णजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।