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दैवासुरसम्पद्विभागयोग

Daivasura Sampad Vibhaga Yoga • अध्याय 16

18
अध्याय सारांश

दैवासुरसम्पद्विभागयोग

मुक्ति की ओर ले जाने वाले दैवीय गुणों (निर्भयता, सत्य) और पतन की ओर ले जाने वाले आसुरी विकारों (क्रोध, दंभ) का वर्गीकरण।

श्लोक 1

श्रीभगवानुवाच | अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः | दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ||१६-१||

Meaning (Hindi)

श्रीकृष्ण बोले — निर्भयता, अंतःकरण की शुद्धि, ज्ञानयोग में दृढ़ता, दान, इंद्रियों का संयम, यज्ञ, स्वाध्याय, तप और सरलता —

Meaning (English)

Krishna said: Fearlessness, purity of heart, steadfastness in knowledge and yoga, charity, self-control, sacrifice, study of scripture, austerity, and straightforwardness —

🪔
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श्लोक 2

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् | दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ||१६-२||

Meaning (Hindi)

अहिंसा, सत्य, क्रोधरहितता, त्याग, शांति, किसी की निंदा न करना, सभी प्राणियों पर दया, लोभ का अभाव, कोमलता, लज्जा और स्थिरता —

Meaning (English)

Non-violence, truthfulness, freedom from anger, renunciation, peacefulness, not speaking ill of others, compassion for all beings, freedom from greed, gentleness, modesty, and steadiness —

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श्लोक 3

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता | भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ||१६-३||

Meaning (Hindi)

हे भारत! तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, द्रोह का अभाव और अहंकार का न होना — ये सब दैवी संपदा को प्राप्त पुरुष के लक्षण हैं।

Meaning (English)

O Arjuna, vigor, forgiveness, courage, cleanliness, freedom from malice, and absence of pride — these are the qualities of one born with a divine nature.

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श्लोक 4

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च | अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् ||१६-४||

Meaning (Hindi)

हे पार्थ! दंभ, अहंकार, घमंड, क्रोध, कठोर वाणी और अज्ञान — ये सब आसुरी संपदा है।

Meaning (English)

O Arjuna, hypocrisy, arrogance, pride, anger, harshness, and ignorance — these belong to one born with a demoniacal nature.

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श्लोक 5

दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता | मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ||१६-५||

Meaning (Hindi)

हे पांडव! दैवी संपदा मोक्ष के लिए है और आसुरी संपदा बंधन के लिए। तुम चिंता मत करो — तुम दैवी संपदा को प्राप्त हुए हो।

Meaning (English)

O Arjuna, the divine nature leads to liberation and the demoniacal to bondage. Do not worry — you are born with divine qualities.

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श्लोक 6

द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च | दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ||१६-६||

Meaning (Hindi)

हे पार्थ! इस संसार में दो प्रकार की सृष्टि है — दैवी और आसुरी। दैवी स्वभाव विस्तार से कहा गया; अब आसुरी स्वभाव को मुझसे सुनो।

Meaning (English)

O Arjuna, in this world there are two kinds of beings — the divine and the demoniacal. The divine has been described in detail; now hear from Me about the demoniacal.

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श्लोक 7

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुराः | न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते ||१६-७||

Meaning (Hindi)

आसुरी स्वभाव के लोग न यह जानते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उनमें न पवित्रता होती है, न सदाचार और न सत्य।

Meaning (English)

People of demoniacal nature do not know what to do and what not to do. There is no purity, no right conduct, and no truth in them.

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श्लोक 8

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम् | अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम् ||१६-८||

Meaning (Hindi)

वे कहते हैं — 'यह जगत असत्य है, बिना किसी आधार के है, ईश्वर से रहित है — यह तो बस स्त्री-पुरुष के संयोग से उत्पन्न हुआ है, और इसका कारण क्या हो सकता है?'

Meaning (English)

They say: 'This world has no truth, no foundation, no God — it came about only from the coming together of man and woman. What else could the reason be?'

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श्लोक 9

एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः | प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ||१६-९||

Meaning (Hindi)

इस सोच को पकड़कर ये नष्टबुद्धि, क्रूर कर्म करने वाले अल्पबुद्धि लोग संसार के शत्रु बनकर उसे नष्ट करने के लिए उत्पन्न होते हैं।

Meaning (English)

Holding onto this view, these lost souls of small intelligence and cruel deeds arise as enemies of the world, bent on destroying it.

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श्लोक 10

काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः | मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः ||१६-१०||

Meaning (Hindi)

दंभ, मान और मद से भरे, कभी न मिटने वाली कामनाओं का सहारा लेकर, मोहवश झूठी धारणाएं अपनाकर ये अशुद्ध संकल्पों वाले लोग संसार में काम करते हैं।

Meaning (English)

Filled with hypocrisy, pride, and arrogance, they cling to desires that can never be satisfied. Driven by delusion and false beliefs, they go about with impure intentions.

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श्लोक 11

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः | कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ||१६-११||

Meaning (Hindi)

मृत्युपर्यंत रहने वाली अनगिनत चिंताओं में घिरे, विषयभोग को ही सर्वोच्च मानकर ये लोग यही मानते हैं — 'बस इतना ही सत्य है।'

Meaning (English)

Caught in endless worries that last until death, believing sense-pleasure is the highest goal, they are convinced that this alone is the truth.

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श्लोक 12

आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः | ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् ||१६-१२||

Meaning (Hindi)

सैकड़ों आशाओं के बंधन में बंधे, काम और क्रोध के वश में ये लोग भोग की पूर्ति के लिए अनुचित तरीकों से धन जमा करने की कोशिश करते हैं।

Meaning (English)

Bound by hundreds of chains of hope, slaves to lust and anger, they strive to hoard wealth through unjust means just to satisfy their desires.

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श्लोक 13

इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ||१६-१३||

Meaning (Hindi)

आज मैंने यह पाया, और वह इच्छा भी पूरी करूंगा; मेरे पास इतना है और आगे भी और मिलेगा' —

Meaning (English)

Today I gained this, and I shall fulfill that desire too; I have this much wealth and will get even more in the future' —

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श्लोक 14

असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि | ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी ||१६-१४||

Meaning (Hindi)

वह शत्रु मेरे द्वारा मारा गया और दूसरों को भी मारूंगा; मैं ईश्वर हूं, भोगी हूं, सिद्ध हूं, बलवान और सुखी हूं' —

Meaning (English)

That enemy was killed by me and I shall kill others too; I am the lord, the enjoyer, perfect, powerful, and happy' —

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श्लोक 15

आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया | यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ||१६-१५||

Meaning (Hindi)

मैं धनवान हूं और श्रेष्ठ कुल में जन्मा हूं, मेरे समान दूसरा कौन है? मैं यज्ञ करूंगा, दान दूंगा, मौज करूंगा' — इस प्रकार अज्ञान से मोहित रहते हैं।

Meaning (English)

I am wealthy, born in a noble family — who equals me? I will perform sacrifice, give charity, enjoy myself' — deluded by such ignorance, they go on.

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श्लोक 16

अनेकचित्तविभ्रान्ता मोहजालसमावृताः | प्रसक्ताः कामभोगेषु पतन्ति नरकेऽशुचौ ||१६-१६||

Meaning (Hindi)

अनेक विचारों से भटके हुए, मोह के जाल में फंसे, विषयभोगों में आसक्त — ये लोग घोर और अपवित्र नरक में गिरते हैं।

Meaning (English)

Bewildered by countless thoughts, entangled in the web of delusion, addicted to pleasure — they fall into a dark and filthy hell.

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श्लोक 17

आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः | यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ||१६-१७||

Meaning (Hindi)

खुद को ही सबसे श्रेष्ठ मानने वाले, घमंडी, धन और मान के नशे में डूबे — ये लोग शास्त्र-विधि को छोड़कर केवल दिखावे के लिए यज्ञ करते हैं।

Meaning (English)

Self-important, stubborn, drunk on wealth and pride — they perform sacrifices in name only, as a show, ignoring all proper scriptural guidelines.

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श्लोक 18

अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः | मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ||१६-१८||

Meaning (Hindi)

अहंकार, बल, अकड़, काम और क्रोध के वश में रहकर दूसरों की निंदा करने वाले ये लोग अपने और दूसरों के शरीर में स्थित मुझ परमात्मा से द्वेष करते हैं।

Meaning (English)

Consumed by ego, force, arrogance, lust, and anger — always criticizing others — these people hate Me, the Supreme Self dwelling in their own bodies and in others.

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श्लोक 19

तानहं द्विषतः क्रुरान्संसारेषु नराधमान् | क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु ||१६-१९||

Meaning (Hindi)

ऐसे द्वेषी, क्रूर और नराधम लोगों को मैं बार-बार इस संसार में आसुरी योनियों में ही जन्म देता हूं।

Meaning (English)

Such hateful, cruel, and degraded people — I repeatedly cast them into demoniacal wombs in this world.

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श्लोक 20

आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि | मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ||१६-२०||

Meaning (Hindi)

हे कौन्तेय! वे मूढ़ जन्म-जन्मांतर में आसुरी योनि पाते हैं और मुझे प्राप्त किए बिना और भी अधम गति को प्राप्त होते हैं।

Meaning (English)

O Arjuna, these deluded ones take birth in demoniacal forms life after life. Never reaching Me, they sink into an even lower state.

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श्लोक 21

त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः | कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ||१६-२१||

Meaning (Hindi)

काम, क्रोध और लोभ — ये तीन नरक के द्वार हैं जो आत्मा का नाश करते हैं; इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।

Meaning (English)

Lust, anger, and greed — these are the three gates of hell that destroy the soul. Therefore, one must give up all three.

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श्लोक 22

एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः | आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ||१६-२२||

Meaning (Hindi)

हे कौन्तेय! जो इन तीनों अंधकार के द्वारों से मुक्त हो जाता है, वह अपने कल्याण का मार्ग अपनाता है और परम गति को प्राप्त होता है।

Meaning (English)

O Arjuna, one who is freed from these three dark gates acts for their own good and thereby reaches the Supreme Goal.

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श्लोक 23

यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः | न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ||१६-२३||

Meaning (Hindi)

जो शास्त्र की विधि को छोड़कर अपनी कामना के अनुसार चलता है, वह न सिद्धि पाता है, न सुख और न परम गति।

Meaning (English)

One who sets aside the guidance of scripture and acts only on personal desire attains neither perfection, nor happiness, nor the Supreme Goal.

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श्लोक 24

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ | ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ||१६-२४||

Meaning (Hindi)

इसलिए तुम्हारे लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं — इसका निर्णय शास्त्र ही है। शास्त्र में बताई गई विधि को जानकर तुम्हें अपने कर्म करने चाहिए।

Meaning (English)

Therefore, let scripture be your guide in knowing what to do and what not to do. Understanding the proper method shown in scripture, you should perform your actions in this world.

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