श्री छान्दोग्योपनिषद्

Chandogya Upanishad • सामवेद

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सामवेद

श्री छान्दोग्योपनिषद्

सामवेद से सम्बद्ध विशाल उपनिषद जिसमें उद्दालक ऋषि और उनके पुत्र श्वेतकेतु के बीच संवाद में 'तत्त्वमसि' का प्रतिपादन हुआ है।

अवसर: गहन वेदान्त अध्ययन (Advanced Vedanta Study)
लाभ: 'तत्त्वमसि' महावाक्य के द्वारा जीव और ब्रह्म की एकता का बोध (Realizing oneness of soul and Brahman)
शांति पाठ

ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि... (समान सामवेद शांति पाठ)

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Om aapyaayantu mamaangaani... (Samaveda Shanti Path)

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हे परमात्मा! मेरे सभी अंग, वाणी, प्राण, इन्द्रियाँ पुष्ट हों...

मंत्र 2

स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदं सर्वं तत्सत्यं स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति॥

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Sa ya esho''nimaitadaatmyamidam sarvam tat satyam sa aatmaa tat tvam asi shvetaketo iti ||

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वह जो यह सूक्ष्म तत्व है, संपूर्ण जगत उसी का स्वरूप है। वही सत्य है, वही परमात्मा है, और हे श्वेतकेतु! "वह ब्रह्म तुम ही हो" (तत्त्वमसि)।

सामवेद
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पठन और मनन सम्पूर्ण

आपने श्री छान्दोग्योपनिषद् के प्रमुख मन्त्रों का मनन पूर्ण किया। वेदों का यह दिव्य प्रकाश आपकी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।