श्री बृहदारण्यकोपनिषद्
Brihadaranyaka Upanishad • शुक्ल यजुर्वेद
श्री बृहदारण्यकोपनिषद्
ऋषिवर याज्ञवल्क्य, गार्गी और मैत्रेयी के अमर आध्यात्मिक संवादों से सुसज्जित सबसे विशाल और गंभीर मुख्य उपनिषद।
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
Om asato maa sadgamaya | Tamaso maa jyotirgamaya | Mrityormaa''mritam gamaya || Om Shaantih Shaantih Shaantih ||
हे ईश्वर! मुझे असत्य (नश्वर संसार) से सत्य (अविनाशी ब्रह्म) की ओर ले चलो। मुझे अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले चलो। मुझे मृत्यु से अमरता (मोक्ष) की ओर ले चलो।
ब्रह्म वा इदमग्र आसीत्, तदात्मानमेवावेत्, अहं ब्रह्मास्मीति। तस्मात्तत्सर्वमभवत्...
Brahma vaa idamagra aaseet, tadaatmaanamevaavet, aham brahmaasmeeti | Tasmaattatsarvamabhavat...
सृष्टि के प्रारम्भ में यह जगत केवल ब्रह्म ही था। उसने स्वयं को जाना कि "मैं ब्रह्म हूँ" (अहं ब्रह्मास्मि)। इस बोध से वह सर्वरूप (सब कुछ) हो गया।
पठन और मनन सम्पूर्ण
आपने श्री बृहदारण्यकोपनिषद् के प्रमुख मन्त्रों का मनन पूर्ण किया। वेदों का यह दिव्य प्रकाश आपकी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।