गुरु मंत्र
गुरुदेव
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गुरुदेवज्ञान और विद्या
गुरु मंत्र
गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तुल्य पूज्य मानकर उनकी वंदना करने वाला श्लोक।
शुभ समय:गुरु पूर्णिमा, दैनिक पूजा आरम्भ में
मुख्य लाभ:मार्गदर्शन, गुरु कृपा, आध्यात्मिक उन्नति (Divine guidance, blessings of mentor, spiritual growth)
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जाप करने की विधि
ध्यान मुद्रा में बैठकर अपने गुरुदेव का मानसिक स्मरण करते हुए ३ बार जपें।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
Gururbrahmā Gururviṣṇuḥ Gururdēvō Mahēśvaraḥ | Guruḥ Sākṣāt Paraṁ Brahma Tasmai Śrīguravē Namaḥ ||
अर्थ
गुरु ही ब्रह्मा हैं (जो सृजन करते हैं), गुरु ही विष्णु हैं (जो पोषण करते हैं), और गुरु ही देव महेश्वर हैं (जो बुराइयों का संहार करते हैं)। गुरु ही साक्षात् परम ब्रह्म (परमेश्वर) हैं, ऐसे श्री सद्गुरुदेव को मेरा सादर प्रणाम है।