श्री शनिदेव चालीसा

शनिदेव

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शनिदेव

श्री शनिदेव चालीसा

कर्मफल दाता शनिदेव की चालीसा जो साढ़े साती और ढैय्या के कष्टों को दूर कर सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

पाठ समय:शनिवार
शुभ फल:शनि दोष निवारण, न्याय, सुरक्षा
◆दोहा 1

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

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Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan | Kahat Ayodhyadaas Tum, Dehu Abhay Vardaan ||

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भगवान गणेशजी को नमन कर भक्त अयोध्यादास शनिदेव की स्तुति शुरू करते हैं और अभय वरदान मांगते हैं।

◉चौपाई 2

जय जय श्री शनिदेव प्रभु। सुनहु विनय महाराज प्रभु॥

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Jai Jai Shree Shanidev Prabhu | Sunahu Vinay Mahaaraaj Prabhu ||

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हे न्याय के देवता शनिदेव प्रभु! आपकी जय हो। कृपया मेरी इस प्रार्थना को स्वीकार कीजिए।

◉चौपाई 3

विकट रूप धरकर तुम आवो। भक्तन के कष्ट मिटाओ॥

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Vikat Roop Dharakar Tum Aavo | Bhaktan Ke Kasht Mitaao ||

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आप अपने न्यायप्रिय और शक्तिशाली रूप में आकर अपने भक्तों के सभी कष्टों को मिटा दीजिए।

◆दोहा 4

शनि चालीसा जो पढ़े, कष्ट रहे न कोय। ग्रह दशा सुधर कर, सुख का आनंद होय॥

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Shani Chalisa Jo Padhe, Kasht Rahe Na Koy | Grah Dasha Sudhar Kar, Sukh Ka Aanand Hoy ||

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जो भी व्यक्ति शनि चालीसा का पाठ करता है, उसके कष्ट दूर हो जाते हैं और उसकी कुंडली के बुरे ग्रहों का प्रभाव सुधर जाता है।

शनिदेव
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चालीसा पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री शनिदेव चालीसा का पाठ पूर्ण किया। शनिदेव आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।