श्री सरस्वती चालीसा
माता सरस्वती
श्री सरस्वती चालीसा
ज्ञान, विज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी वीणावादिनी माता सरस्वती की वंदना।
जनक जननि पद रज धरि, निज मस्तक पर भाल। कृपा करहु हरि लाड़िली, बुद्धि ज्ञान बल ढाल॥
Janak Janani Pad Raj Dhari, Nij Mastak Par Bhaal | Kripa Karahu Hari Laadilee, Buddhi Gyan Bal Dhaal ||
अपने जन्मदाता माता-पिता के चरणों की धूल माथे पर लगाकर, मैं श्रीहरि की प्यारी माता सरस्वती से बुद्धि और ज्ञान का वरदान मांगता हूँ।
जय सरस्वती श्वेत वरण माता। विद्या बुद्धि ज्ञान की दाता॥
Jai Sarasvatee Shvet Varan Maata | Vidya Buddhi Gyan Kee Daata ||
सफेद वस्त्रों वाली माता सरस्वती की जय हो, जो सबको शिक्षा, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं।
वीणा वादिनी वीणा बजावे। हंस वाहिनी मन हर्षावे॥
Veena Vaadinee Veena Bajaave | Hans Vaahinee Man Harshaave ||
हाथ में वीणा लेकर मधुर धुन बजाने वाली और हंस की सवारी करने वाली माँ सरस्वती सबका मन आनंदित करती हैं।
सरस्वती चालीसा पढ़े, विद्या बुद्धि मन लाय। ज्ञान बढे संसार में, परीक्षा में सफलता पाय॥
Sarasvatee Chalisa Padhe, Vidya Buddhi Man Laay | Gyan Badhe Sansaar Mein, Pareeksha Mein Saphalta Paay ||
जो भी एकाग्र मन से सरस्वती चालीसा का पाठ करता है, उसका ज्ञान बढ़ता है और उसे परीक्षाओं तथा कला में सफलता मिलती है।
चालीसा पाठ सम्पूर्ण
आपने श्री सरस्वती चालीसा का पाठ पूर्ण किया। माता सरस्वती आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।