श्री सरस्वती चालीसा

माता सरस्वती

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माता सरस्वती

श्री सरस्वती चालीसा

ज्ञान, विज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी वीणावादिनी माता सरस्वती की वंदना।

पाठ समय:बसंत पंचमी, परीक्षा के दिन
शुभ फल:विद्या, बुद्धि, कला, वाणी शुद्धि
◆दोहा 1

जनक जननि पद रज धरि, निज मस्तक पर भाल। कृपा करहु हरि लाड़िली, बुद्धि ज्ञान बल ढाल॥

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Janak Janani Pad Raj Dhari, Nij Mastak Par Bhaal | Kripa Karahu Hari Laadilee, Buddhi Gyan Bal Dhaal ||

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अपने जन्मदाता माता-पिता के चरणों की धूल माथे पर लगाकर, मैं श्रीहरि की प्यारी माता सरस्वती से बुद्धि और ज्ञान का वरदान मांगता हूँ।

◉चौपाई 2

जय सरस्वती श्वेत वरण माता। विद्या बुद्धि ज्ञान की दाता॥

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Jai Sarasvatee Shvet Varan Maata | Vidya Buddhi Gyan Kee Daata ||

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सफेद वस्त्रों वाली माता सरस्वती की जय हो, जो सबको शिक्षा, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं।

◉चौपाई 3

वीणा वादिनी वीणा बजावे। हंस वाहिनी मन हर्षावे॥

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Veena Vaadinee Veena Bajaave | Hans Vaahinee Man Harshaave ||

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हाथ में वीणा लेकर मधुर धुन बजाने वाली और हंस की सवारी करने वाली माँ सरस्वती सबका मन आनंदित करती हैं।

◆दोहा 4

सरस्वती चालीसा पढ़े, विद्या बुद्धि मन लाय। ज्ञान बढे संसार में, परीक्षा में सफलता पाय॥

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Sarasvatee Chalisa Padhe, Vidya Buddhi Man Laay | Gyan Badhe Sansaar Mein, Pareeksha Mein Saphalta Paay ||

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जो भी एकाग्र मन से सरस्वती चालीसा का पाठ करता है, उसका ज्ञान बढ़ता है और उसे परीक्षाओं तथा कला में सफलता मिलती है।

माता सरस्वती
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चालीसा पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री सरस्वती चालीसा का पाठ पूर्ण किया। माता सरस्वती आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।