श्री लक्ष्मी चालीसा

माता लक्ष्मी

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माता लक्ष्मी

श्री लक्ष्मी चालीसा

सुख, समृद्धि और धन की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की पावन स्तुति।

पाठ समय:शुक्रवार, दिवाली
शुभ फल:धन-धान्य, वैभव, दरिद्रता का नाश
◆दोहा 1

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

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Maatu Lakshmee Kari Kripa, Karo Hriday Mein Vaas | Manokaamana Siddh Kari, Puravahu Meree Aas ||

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हे माता लक्ष्मी! कृपा करके मेरे हृदय में वास कीजिए। मेरी सारी मनोकामनाओं को सिद्ध कर मेरी आशाओं को पूर्ण कीजिए।

◉चौपाई 2

जय जय लक्ष्मी जननी माता। सब जग की तुम भाग्य विधाता॥

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Jai Jai Lakshmee Jananee Maata | Sab Jag Kee Tum Bhaagya Vidhaata ||

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समस्त संसार की माता लक्ष्मी देवी की जय हो, आप ही पूरे जगत की भाग्य विधाता (सौभाग्य देने वाली) हैं।

◉चौपाई 3

ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला। कोई न रहे दरिद्र सवाला॥

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Riddhi Siddhi De Karahu Nihaala | Koee Na Rahe Daridra Savaala ||

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हमें रिद्धि-सिद्धि देकर सुखी कीजिए, ताकि संसार में कोई भी गरीब या लाचार न रहे।

◉चौपाई 4

क्षीरसिन्धु में जन्म तुम्हारा। सब देवों ने शीश नवाया॥

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Ksheerasindhu Mein Janma Tumhaara | Sab Devon Ne Sheesh Navaaya ||

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क्षीर सागर के मंथन से आपका जन्म हुआ, आपके इस पावन रूप को देखकर सभी देवताओं ने सिर झुकाया।

◆दोहा 5

जो यह पढ़े लक्ष्मी चालीसा। सुख सम्पत्ति पावे साखी गौरीसा॥

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Jo Yah Padhe Lakshmee Chalisa | Sukh Sampatti Paave Saakhee Gaureesa ||

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जो कोई भी इस लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है, उसे जीवन में सुख और समृद्धि मिलती है।

माता लक्ष्मी
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चालीसा पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ पूर्ण किया। माता लक्ष्मी आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।