श्री गायत्री चालीसा
गायत्री माता
श्री गायत्री चालीसा
वेदों की माता (वेदमाता) भगवती गायत्री की स्तुति जो बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करती है।
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति क्रान्ति जागृति प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥
Hreem Shreem Kleem Medha Prabha, Jeevan Jyoti Prachand | Shaanti Kraanti Jaagriti Pragati, Rachana Shakti Akhand ||
बीज मंत्रों के साथ बुद्धि और प्रकाश देने वाली, जीवन की अखंड ज्योति, शांति और प्रगति की शक्ति माता गायत्री को मेरा प्रणाम है।
जयति जयति गायत्री माता। जगत जननी वेदों की माता॥
Jayati Jayati Gaayatree Maata | Jagat Jananee Vedon Kee Maata ||
हे गायत्री माता! आपकी जय हो, आप वेदों की जननी (वेदमाता) और पूरे जगत की माता हैं।
सद्बुद्धि का दान दो माता। तुम ही हमारी भाग्य विधाता॥
Sadbuddhi Ka Daan Do Maata | Tum Hee Hamaaree Bhaagya Vidhaata ||
हे माता! हमें हमेशा सन्मार्ग पर चलने वाली सद्बुद्धि दान कीजिए, आप ही हमारी भाग्य विधाता हैं।
गायत्री चालीसा पढ़े, मन में धरे प्रकाश। सद्बुद्धि का उदय हो, मिटे अविद्या का नाश॥
Gaayatree Chalisa Padhe, Man Mein Dhare Prakaash | Sadbuddhi Ka Uday Ho, Mite Avidya Ka Naash ||
जो कोई भी गायत्री चालीसा का पाठ करता है, उसका अज्ञान नष्ट हो जाता है और उसके मन में ज्ञान का दिव्य प्रकाश फैलता है।
चालीसा पाठ सम्पूर्ण
आपने श्री गायत्री चालीसा का पाठ पूर्ण किया। गायत्री माता आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।