श्री गायत्री चालीसा

गायत्री माता

18
गायत्री माता

श्री गायत्री चालीसा

वेदों की माता (वेदमाता) भगवती गायत्री की स्तुति जो बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करती है।

पाठ समय:ब्रह्ममुहूर्त , दैनिक पूजा
शुभ फल:आत्मज्ञान, पाप नाश, मानसिक तेज
◆दोहा 1

ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति क्रान्ति जागृति प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥

•

Hreem Shreem Kleem Medha Prabha, Jeevan Jyoti Prachand | Shaanti Kraanti Jaagriti Pragati, Rachana Shakti Akhand ||

💡

बीज मंत्रों के साथ बुद्धि और प्रकाश देने वाली, जीवन की अखंड ज्योति, शांति और प्रगति की शक्ति माता गायत्री को मेरा प्रणाम है।

◉चौपाई 2

जयति जयति गायत्री माता। जगत जननी वेदों की माता॥

•

Jayati Jayati Gaayatree Maata | Jagat Jananee Vedon Kee Maata ||

💡

हे गायत्री माता! आपकी जय हो, आप वेदों की जननी (वेदमाता) और पूरे जगत की माता हैं।

◉चौपाई 3

सद्बुद्धि का दान दो माता। तुम ही हमारी भाग्य विधाता॥

•

Sadbuddhi Ka Daan Do Maata | Tum Hee Hamaaree Bhaagya Vidhaata ||

💡

हे माता! हमें हमेशा सन्मार्ग पर चलने वाली सद्बुद्धि दान कीजिए, आप ही हमारी भाग्य विधाता हैं।

◆दोहा 4

गायत्री चालीसा पढ़े, मन में धरे प्रकाश। सद्बुद्धि का उदय हो, मिटे अविद्या का नाश॥

•

Gaayatree Chalisa Padhe, Man Mein Dhare Prakaash | Sadbuddhi Ka Uday Ho, Mite Avidya Ka Naash ||

💡

जो कोई भी गायत्री चालीसा का पाठ करता है, उसका अज्ञान नष्ट हो जाता है और उसके मन में ज्ञान का दिव्य प्रकाश फैलता है।

गायत्री माता
✦✦✦

चालीसा पाठ सम्पूर्ण

आपने श्री गायत्री चालीसा का पाठ पूर्ण किया। गायत्री माता आपको बल, बुद्धि और कल्याण प्रदान करें।