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अर्जुनविषादयोग

Arjuna Vishada Yoga • अध्याय 1

18
अध्याय सारांश

अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने गुरुजनों और संबंधियों से युद्ध करने की संभावना से व्याकुल होकर अर्जुन का शोक और शस्त्र-त्याग।

श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच | धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||१-१||

Meaning (Hindi)

धृतराष्ट्र बोले — हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में इकट्ठा हुए, युद्ध करने को तैयार, मेरे और पाण्डु के बेटों ने क्या किया?

Meaning (English)

Dhritarashtra said: O Sanjaya, what did my sons and the sons of Pandu do when they gathered on the holy field of Kurukshetra, ready to fight?

🪔
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श्लोक 2

सञ्जय उवाच | दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ||१-२||

Meaning (Hindi)

संजय बोले — पाण्डवों की सेना को व्यूह-रचना में खड़ा देखकर राजा दुर्योधन गुरु द्रोणाचार्य के पास गया और बोला —

Meaning (English)

Sanjaya said: Seeing the Pandava army lined up in battle formation, King Duryodhana went to his teacher Drona and said —

🪔
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श्लोक 3

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् | व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ||१-३||

Meaning (Hindi)

हे गुरुजी! देखिए, पाण्डु के बेटों की इस विशाल सेना को, जिसे आपके ही बुद्धिमान शिष्य धृष्टद्युम्न ने व्यूह-रचना में खड़ा किया है।

Meaning (English)

O Teacher! Look at this great army of Pandu's sons, arranged in battle formation by your own wise student, Dhrishtadyumna, son of Drupada.

🪔
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श्लोक 4

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि | युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ||१-४||

Meaning (Hindi)

इस सेना में बड़े-बड़े धनुर्धर वीर योद्धा हैं, जो युद्ध में भीम और अर्जुन के बराबर हैं — जैसे युयुधान (सात्यकि), विराट और महारथी द्रुपद।

Meaning (English)

In this army there are great warrior archers equal to Bhima and Arjuna in battle — like Yuyudhana (Satyaki), Virata, and the mighty charioteer Drupada.

🪔
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श्लोक 5

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् | पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः ||१-५||

Meaning (Hindi)

धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य भी हैं।

Meaning (English)

Also Dhrishtaketu, Chekitana, the brave king of Kashi, Purujit, Kuntibhoja, and Shaibya — the best among men.

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श्लोक 6

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् | सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ||१-६||

Meaning (Hindi)

पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्तमौजा, सुभद्रा के बेटे अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों बेटे — ये सब-के-सब महारथी हैं।

Meaning (English)

The valiant Yudhamanyu, the brave Uttamaujas, the son of Subhadra (Abhimanyu), and the five sons of Draupadi — all of them are great warriors.

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श्लोक 7

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम | नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ||१-७||

Meaning (Hindi)

हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अब हमारी तरफ़ के भी जो खास योद्धा हैं, उन्हें भी जान लीजिए। आपकी जानकारी के लिए मैं अपनी सेना के प्रमुख नायकों के नाम बताता हूँ।

Meaning (English)

O best among Brahmins! Now let me also tell you about the distinguished warriors on our side — the leaders of my army — for your information.

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श्लोक 8

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः | अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ||१-८||

Meaning (Hindi)

एक तो आप स्वयं हैं, फिर भीष्म पितामह, कर्ण, युद्ध में हमेशा जीतने वाले कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा।

Meaning (English)

There is yourself (Drona), Bhishma, Karna, Kripa (who always wins in battle), Ashwatthama, Vikarna, and Bhurishrava, the son of Somadatta.

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श्लोक 9

अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः | नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ||१-९||

Meaning (Hindi)

और भी बहुत से शूरवीर हैं जो मेरे लिए अपनी जान देने को तैयार हैं। ये सब तरह-तरह के हथियारों से लैस हैं और युद्ध कला में बहुत माहिर हैं।

Meaning (English)

And many other brave heroes who are ready to give up their lives for me, armed with all kinds of weapons, all skilled in warfare.

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श्लोक 10

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् | पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ||१-१०||

Meaning (Hindi)

भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारी सेना की शक्ति असीमित है, जबकि भीम द्वारा रक्षित पाण्डवों की सेना की शक्ति सीमित है।

Meaning (English)

Our army, protected by Bhishma, is unlimited in strength, while their army, protected by Bhima, is limited in strength.

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श्लोक 11

अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः | भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ||१-११||

Meaning (Hindi)

इसलिए आप सब लोग अपने-अपने मोर्चों पर डटे रहकर हर तरफ़ से भीष्म पितामह की रक्षा करें।

Meaning (English)

So all of you, standing firm at your respective positions on all fronts, must protect Bhishma from every side.

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श्लोक 12

तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः | सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ||१-१२||

Meaning (Hindi)

उस समय कौरवों में सबसे बुज़ुर्ग, प्रतापी पितामह भीष्म ने दुर्योधन को खुश करने के लिए ज़ोर से सिंह-गर्जना करते हुए शंख बजाया।

Meaning (English)

Then the glorious grandsire Bhishma, the eldest of the Kauravas, roared like a lion and blew his conch loudly to fill Duryodhana's heart with joy.

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श्लोक 13

ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः | सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ||१-१३||

Meaning (Hindi)

उसके बाद एक साथ शंख, नगाड़े, ढोल, मृदंग और तुरहियाँ बज उठीं। उनकी आवाज़ बहुत भयानक थी।

Meaning (English)

After that, all at once, conches, kettledrums, tabors, drums and horns blared together — the sound was tremendous.

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श्लोक 14

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ | माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ||१-१४||

Meaning (Hindi)

फिर सफ़ेद घोड़ों वाले शानदार रथ पर बैठे श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी अपने-अपने दिव्य शंख बजाए।

Meaning (English)

Then Krishna and Arjuna, seated in their magnificent chariot pulled by white horses, also blew their divine conches.

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श्लोक 15

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः | पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ||१-१५||

Meaning (Hindi)

श्रीकृष्ण ने पाञ्चजन्य, अर्जुन ने देवदत्त और भयंकर कर्म करने वाले भीम ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया।

Meaning (English)

Krishna blew the Panchajanya, Arjuna blew the Devadatta, and the mighty Bhima, doer of tremendous deeds, blew the great conch Paundra.

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श्लोक 16

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः | नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ||१-१६||

Meaning (Hindi)

कुन्ती के बेटे राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक शंख बजाया, और नकुल तथा सहदेव ने क्रमशः सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए।

Meaning (English)

King Yudhishthira, son of Kunti, blew the Anantavijaya; Nakula and Sahadeva blew the Sughosha and Manipushpaka respectively.

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श्लोक 17

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः | धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ||१-१७||

Meaning (Hindi)

श्रेष्ठ धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट और अजेय सात्यकि —

Meaning (English)

The excellent archer king of Kashi, the great warrior Shikhandi, Dhrishtadyumna, King Virata, and the unconquered Satyaki —

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श्लोक 18

द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते | सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ||१-१८||

Meaning (Hindi)

हे राजन! राजा द्रुपद, द्रौपदी के बेटे और महाबाहु अभिमन्यु — इन सबने अलग-अलग शंख बजाए।

Meaning (English)

O King! Drupada, the sons of Draupadi, and the mighty-armed Abhimanyu — all of them blew their conches separately.

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श्लोक 19

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् | नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् (or लोव्यनु) ||१-१९||

Meaning (Hindi)

उस भयंकर शंखध्वनि ने आकाश और धरती को गुंजा दिया और धृतराष्ट्र के बेटों के दिल दहला दिए।

Meaning (English)

That thunderous sound echoed through the sky and the earth, and it shook the hearts of Dhritarashtra's sons.

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श्लोक 20

अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः | प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः | हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ||१-२०||

Meaning (Hindi)

हे राजन! उस समय जब युद्ध शुरू होने ही वाला था, तब हनुमान के चिह्न वाली ध्वजा वाले अर्जुन ने धृतराष्ट्र के बेटों को सामने खड़ा देखकर अपना धनुष उठाया और श्रीकृष्ण से बोले —

Meaning (English)

O King! Just as the battle was about to begin, Arjuna — whose flag bore the symbol of Hanuman — saw the sons of Dhritarashtra standing before him, picked up his bow, and spoke these words to Krishna —

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श्लोक 21

अर्जुन उवाच | सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ||१-२१||

Meaning (Hindi)

अर्जुन बोले — हे अच्युत! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले जाकर खड़ा कीजिए।

Meaning (English)

Arjuna said: O Achyuta! Please drive my chariot into the middle between the two armies.

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श्लोक 22

यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् | कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ||१-२२||

Meaning (Hindi)

ताकि मैं देख सकूँ कि युद्ध की इच्छा से यहाँ कौन-कौन खड़े हैं और इस युद्ध में मुझे किन-किन से लड़ना है।

Meaning (English)

So that I may see who stands here eager to fight, and understand with whom I must do battle in this war.

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श्लोक 23

योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः | धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ||१-२३||

Meaning (Hindi)

मैं उन लोगों को देखना चाहता हूँ जो दुर्बुद्धि दुर्योधन का भला चाहकर यहाँ युद्ध करने आए हैं।

Meaning (English)

I want to look at those who have come here to fight, wishing to please the evil-minded Duryodhana.

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श्लोक 24

सञ्जय उवाच | एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ||१-२४||

Meaning (Hindi)

संजय बोले — हे भरतवंशी! अर्जुन के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने उस श्रेष्ठ रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले जाकर खड़ा कर दिया —

Meaning (English)

Sanjaya said: O Dhritarashtra! When Arjuna spoke these words, Krishna drove that magnificent chariot into the middle between the two armies —

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श्लोक 25

भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् | उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ||१-२५||

Meaning (Hindi)

भीष्म, द्रोण और सभी राजाओं के सामने, और बोले — हे पार्थ! यहाँ इकट्ठा हुए इन सभी कौरवों को देखो।

Meaning (English)

In front of Bhishma, Drona and all the kings, and said: O Partha! Look at all these Kauravas gathered here.

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श्लोक 26

तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान् | आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ||१-२६||

Meaning (Hindi)

वहाँ अर्जुन ने दोनों सेनाओं में अपने चाचा-ताऊ, दादा-परदादा, गुरुजन, मामा, भाई, बेटे, पोते, दोस्त, ससुर और शुभचिन्तकों को देखा।

Meaning (English)

There, Arjuna saw standing in both armies his uncles, grandfathers, teachers, maternal uncles, brothers, sons, grandsons, friends, fathers-in-law, and well-wishers.

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श्लोक 27

श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि | तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ||१-२७||

Meaning (Hindi)

इस तरह अपने सब बन्धु-बान्धवों को सामने खड़ा देखकर अर्जुन का मन करुणा से भर गया और दुखी होकर उसने कहा —

Meaning (English)

Seeing all his relatives and loved ones gathered there, Arjuna’s heart filled with compassion and he spoke with deep sorrow —

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श्लोक 28

कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् | अर्जुन उवाच | दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् ||१-२८||

Meaning (Hindi)

अर्जुन बोले — हे कृष्ण! युद्ध के लिए आए इन अपनों को देखकर मुझ पर करुणा छा गई और मैं दुखी होकर यह कह रहा हूँ।

Meaning (English)

Arjuna said: O Krishna! Seeing my own people here, ready to fight, I am overcome with compassion and grief, and I speak these words.

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श्लोक 29

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति | वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ||१-२९||

Meaning (Hindi)

अर्जुन बोले — हे कृष्ण! युद्ध के लिए आए इन अपनों को देखकर मेरे हाथ-पैर शिथिल हो रहे हैं, मुँह सूख रहा है और शरीर में कँपकँपी और रोमांच हो रहा है।

Meaning (English)

Arjuna said: O Krishna! Seeing my own people here, ready to fight, my limbs are giving way, my mouth is drying up, and my body is trembling with goosebumps.

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श्लोक 30

गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते | न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ||१-३०||

Meaning (Hindi)

मेरे हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है, त्वचा जल रही है, मन भटक रहा है और मैं खड़े रहने में भी असमर्थ हूँ।

Meaning (English)

My Gandiva bow is slipping from my hands, my skin is burning, my mind is spinning, and I am unable to even stand up.

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श्लोक 31

निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव | न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ||१-३१||

Meaning (Hindi)

हे केशव! मुझे सब शकुन बुरे दिख रहे हैं। युद्ध में अपनों को मारकर मुझे कोई भलाई नहीं दिखती।

Meaning (English)

O Keshava! I see bad omens all around. I see no good in killing my own people in this battle.

🪔
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श्लोक 32

न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च | किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा ||१-३२||

Meaning (Hindi)

हे कृष्ण! मैं न जीत चाहता हूँ, न राज्य और न सुख। हे गोविन्द! हमें राज्य, भोग या जीवन से भी क्या फ़ायदा?

Meaning (English)

O Krishna! I don’t want victory, or a kingdom, or pleasures. O Govinda! What is the use of a kingdom, or enjoyments, or even life itself?

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श्लोक 33

येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च | त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ||१-३३||

Meaning (Hindi)

जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख चाहते हैं, वो सब लोग धन-दौलत और प्राणों की आशा छोड़कर युद्ध के मैदान में खड़े हैं।

Meaning (English)

Those for whose sake we want a kingdom, enjoyments and happiness — they are standing right here in this battlefield, ready to give up their wealth and lives.

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श्लोक 34

आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः | मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा ||१-३४||

Meaning (Hindi)

वे हैं — गुरुजन, चाचा-ताऊ, बेटे, दादा-परदादा, मामा, ससुर, पोते, साले और अन्य सम्बन्धी।

Meaning (English)

They are — teachers, uncles, sons, grandfathers, maternal uncles, fathers-in-law, grandsons, brothers-in-law and other relatives.

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श्लोक 35

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन | अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ||१-३५||

Meaning (Hindi)

हे मधुसूदन! भले ही ये मुझे मार डालें, मैं इन्हें मारना नहीं चाहता — चाहे तीनों लोकों का राज्य मिल जाए, फिर पृथ्वी का राज्य तो छोड़ो ही।

Meaning (English)

O Madhusudana! Even if they kill me, I do not wish to kill them — not even for the rulership of all three worlds, let alone for this earth.

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श्लोक 36

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन | पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ||१-३६||

Meaning (Hindi)

हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के बेटों को मारकर हमें क्या खुशी मिलेगी? इन आततायियों को मारने से तो हमें पाप ही लगेगा।

Meaning (English)

O Janardana! What joy will we get from killing the sons of Dhritarashtra? We will only earn sin by killing these aggressors.

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श्लोक 37

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् | स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ||१-३७||

Meaning (Hindi)

इसलिए हे माधव! अपने ही बन्धुओं, धृतराष्ट्र के बेटों को मारना हमारे लिए उचित नहीं है। अपनों को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?

Meaning (English)

So O Madhava! It is not right for us to kill our own kinsmen, the sons of Dhritarashtra. How can we ever be happy after killing our own people?

🪔
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श्लोक 38

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः | कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ||१-३८||

Meaning (Hindi)

भले ही लोभ से अंधे हुए ये लोग कुल के नाश का पाप और दोस्तों से धोखा करने का पाप नहीं देखते।

Meaning (English)

Even though these people, blinded by greed, don’t see the sin of destroying the family and betraying friends —

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श्लोक 39

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् | कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ||१-३९||

Meaning (Hindi)

लेकिन हे जनार्दन! कुल के नाश से होने वाले पाप को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से पीछे हटने के बारे में क्यों नहीं सोचना चाहिए?

Meaning (English)

But O Janardana! Why shouldn’t we — who can clearly see the wrong in destroying the family — think about turning back from this sin?

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श्लोक 40

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः | धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ||१-४०||

Meaning (Hindi)

कुल के नष्ट होने पर सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं। धर्म के नष्ट होने पर पूरे कुल को पाप (अधर्म) दबा लेता है।

Meaning (English)

When a family is destroyed, its age-old traditions and duties are lost. And when those duties are lost, the whole family is overtaken by sin (adharma).

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श्लोक 41

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः | स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ||१-४१||

Meaning (Hindi)

हे कृष्ण! पाप के बढ़ने से कुल की स्त्रियाँ भ्रष्ट हो जाती हैं। हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के भ्रष्ट होने पर वर्णसंकर होता है।

Meaning (English)

O Krishna! When sin grows, the women of the family lose their way. O Varshneya! When women go astray, caste mixing (varnasankara) happens.

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श्लोक 42

सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च | पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ||१-४२||

Meaning (Hindi)

वर्णसंकर कुल को नष्ट करने वालों और कुल को नरक में ले जाता है। पिण्डदान और जलदान से वंचित इनके पितर भी नरक में गिर जाते हैं।

Meaning (English)

This caste mixing leads the destroyers of the family and the family itself to hell. Their ancestors also fall, deprived of offerings of food and water.

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श्लोक 43

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः | उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ||१-४३||

Meaning (Hindi)

इन वर्णसंकर पैदा करने वाले दोषों से कुलघातियों के सनातन कुलधर्म और जातिधर्म नष्ट हो जाते हैं।

Meaning (English)

These sins of the family destroyers — which cause caste mixing — wipe out the eternal traditions and duties of the family and community.

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श्लोक 44

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन | नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम (or नरकेऽनियतं) ||१-४४||

Meaning (Hindi)

हे जनार्दन! हमने सुना है कि जिनके कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, उन मनुष्यों को लम्बे समय तक नरक में रहना पड़ता है।

Meaning (English)

O Janardana! We have heard that people whose family traditions are destroyed have to dwell in hell for a very long time.

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श्लोक 45

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् | यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ||१-४५||

Meaning (Hindi)

हाय! कितने दुख की बात है कि हम बहुत बड़ा पाप करने का निश्चय कर बैठे हैं, क्योंकि हम राज्य-सुख के लोभ में अपने ही लोगों को मारने पर तुले हैं।

Meaning (English)

Alas! What a great sin we are about to commit — we are ready to kill our own people out of greed for the pleasures of a kingdom.

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श्लोक 46

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः | धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ||१-४६||

Meaning (Hindi)

यदि शस्त्रहीन और बिना प्रतिकार करने वाले मुझे शस्त्रधारी कौरव युद्ध में मार भी दें, तो भी वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।

Meaning (English)

If the armed sons of Dhritarashtra were to kill me in battle — unarmed and without resistance — even that would be better for me.

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श्लोक 47

सञ्जय उवाच | एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत् | विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ||१-४७||

Meaning (Hindi)

संजय बोले — इतना कहकर, शोक से व्याकुल मन वाले अर्जुन ने युद्धभूमि में तीर-धनुष छोड़कर रथ के पिछले भाग में बैठ गया।

Meaning (English)

Sanjaya said: Having said all this, with his mind overwhelmed by grief, Arjuna dropped his bow and arrows in the battlefield and sat down at the back of the chariot.

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सांख्ययोग

अध्याय 2

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