Skip to content
MySanatani Logo
MySanatani
Ancient Wisdom. Modern Life.
वॉलपेपरआजकृष्ण AIध्यानग्रंथरिपोर्ट्सस्टोर
लॉगिन
Loading...
MySanatani Logo
MySanatani
Ancient Wisdom. Modern Life.

अन्वेषण

  • वॉलपेपर
  • आज
  • कृष्ण AI
  • ध्यान
  • ग्रंथ एक्सप्लोरर
  • रिपोर्ट्स
  • स्टोर

खाता और सहायता

  • लॉगिन
  • सेटिंग्स
  • प्रश्नोत्तर
  • रिफंड और रिप्लेसमेंट
  • शिपिंग और डिलीवरी
  • रद्द करने की नीति
  • व्हाट्सएप सहायता

जुड़ें

गोपनीयता·शर्तें·रिफंड·शिपिंग

गर्व से सनातनी 🪷 भारत में निर्मित

© 2026 HIRPARAS TECH ENTERPRISE. सर्वाधिकार सुरक्षित।

आज
ग्रंथ
कृष्ण AI
ध्यान
स्टोर
MySanatani Logo
MySanatani
Ancient Wisdom. Modern Life.
वॉलपेपरआजकृष्ण AIध्यानग्रंथरिपोर्ट्सस्टोर
लॉगिन

विभूतियोग

Vibhuti Yoga • अध्याय 10

18
अध्याय सारांश

विभूतियोग

कृष्ण अपने दिव्य ऐश्वर्यों और स्वरूपों का वर्णन करते हैं, यह बताते हुए कि सृष्टि का हर तेज और सौंदर्य उन्हीं का अंश है।

श्लोक 1

श्रीभगवानुवाच | भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः | यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ||१०-१||

Meaning (Hindi)

श्रीकृष्ण बोले — हे महाबाहो! तुम मुझसे बहुत प्रेम करते हो, इसलिए तुम्हारे भले के लिए मैं फिर एक बार अपनी परम बात कहता हूँ, सुनो।

Meaning (English)

Krishna said: You love Me dearly, so for your benefit I will share My highest teaching once more. Listen carefully.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 2

न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः | अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ||१०-२||

Meaning (Hindi)

न देवता मेरी उत्पत्ति जानते हैं, न महर्षि — क्योंकि मैं ही सब देवताओं और महर्षियों का भी मूल कारण हूँ।

Meaning (English)

Neither the gods nor the great sages know where I come from, because I am the very source of all of them.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 3

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् | असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ||१०-३||

Meaning (Hindi)

जो मुझे अजन्मा, अनादि और सभी लोकों का महान ईश्वर जानता है, वह इंसान भ्रम से मुक्त होकर सारे पापों से छूट जाता है।

Meaning (English)

Whoever knows Me as unborn, without a beginning, and the great Lord of all worlds — that person, free from confusion, is freed from all sins.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 4

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः | सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च ||१०-४||

Meaning (Hindi)

बुद्धि, ज्ञान, भ्रम का न होना, क्षमा, सत्य, इंद्रिय-संयम, मन का संयम, सुख, दुख, जन्म-मृत्यु, भय और निर्भयता —

Meaning (English)

Intelligence, wisdom, freedom from confusion, forgiveness, truth, control of the senses, control of the mind, happiness, sorrow, birth and death, fear and fearlessness —

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 5

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः | भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः ||१०-५||

Meaning (Hindi)

अहिंसा, समभाव, संतोष, तप, दान, यश और अपयश — ये सब जीवों के अलग-अलग भाव मुझसे ही प्रकट होते हैं।

Meaning (English)

Non-violence, equanimity, contentment, discipline, generosity, fame and dishonour — all these different qualities of living beings arise from Me alone.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 6

महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा | मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः ||१०-६||

Meaning (Hindi)

सात महर्षि, पहले के चार सनकादि और चौदह मनु — ये सब मेरे संकल्प से मेरे भाव से पैदा हुए हैं। इन्हीं से संसार की सारी प्रजा है।

Meaning (English)

The seven great sages, the ancient four (Sanaka and others), and the fourteen Manus — all were born from My will, with My nature. All the people of this world have come from them.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 7

एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः | सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः ||१०-७||

Meaning (Hindi)

जो मेरी इस विभूति और योग शक्ति को सच में जान लेता है, वह पक्के और अडिग योग से जुड़ जाता है — इसमें कोई शक नहीं।

Meaning (English)

Whoever truly understands My divine manifestations and this power of Mine becomes firmly established in unshakeable Yoga — there is no doubt about this.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 8

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते | इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ||१०-८||

Meaning (Hindi)

मैं ही सबका मूल हूँ, मुझसे ही सब कुछ चलता है — ऐसा जानकर बुद्धिमान लोग भक्ति भाव से मुझे ही भजते हैं।

Meaning (English)

I am the source of everything; everything flows from Me. Knowing this, the wise worship Me with love and devotion.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 9

मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम् | कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ||१०-९||

Meaning (Hindi)

जिनका मन और प्राण मुझमें लगे हैं, वो आपस में मेरी बातें करते हुए और मुझे ही सुनाते-बताते हुए संतुष्ट और आनंदित रहते हैं।

Meaning (English)

Their minds and lives completely absorbed in Me, they talk about Me with each other, always speaking of Me — and they stay satisfied and delighted.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 10

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् | ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ||१०-१०||

Meaning (Hindi)

जो हमेशा मुझसे जुड़े हैं और प्रेम से मेरी भक्ति करते हैं — उन्हें मैं वह बुद्धि-योग देता हूँ जिससे वो मुझे पा सकते हैं।

Meaning (English)

To those who are always connected to Me and worship Me with love, I give the insight and wisdom through which they come to Me.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 11

तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः | नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ||१०-११||

Meaning (Hindi)

उन पर दया करके मैं उनके भीतर रहते हुए, ज्ञान के प्रकाशमय दीपक से उनके अज्ञान का अँधेरा नष्ट कर देता हूँ।

Meaning (English)

Out of compassion for them, I live within them and destroy the darkness born of ignorance using the shining lamp of knowledge.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 12

अर्जुन उवाच | परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् | पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ||१०-१२||

Meaning (Hindi)

अर्जुन बोले — आप परम ब्रह्म हैं, परम धाम हैं, परम पवित्र हैं। आप ही सनातन दिव्य पुरुष हैं, देवों के भी आदि देव, अजन्मा और सर्वव्यापी हैं।

Meaning (English)

Arjuna said: You are the Supreme Brahman, the supreme home, the supreme purifier. You are the eternal, divine Person — the original God, unborn and all-pervading.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 13

आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा | असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ||१०-१३||

Meaning (Hindi)

ऐसा सभी ऋषियों ने कहा है — देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास ने भी। और अब आप खुद भी मुझसे यही कह रहे हैं।

Meaning (English)

All the sages have said this about You — the divine sage Narada, Asita, Devala and Vyasa. And now You Yourself are telling me the same.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 14

सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव | न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः ||१०-१४||

Meaning (Hindi)

हे केशव! आप मुझसे जो कुछ कह रहे हैं, मैं उसे सच मानता हूँ। हे भगवन! आपके असली स्वरूप को न देवता जानते हैं न दानव।

Meaning (English)

O Krishna! I accept everything You are telling me as true. O Lord! Neither the gods nor the demons truly know Your real form.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 15

स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम | भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ||१०-१५||

Meaning (Hindi)

हे पुरुषोत्तम! हे भूतेश! हे देवों के देव! हे जगत के स्वामी! आप तो बस खुद ही अपने को जानते हैं।

Meaning (English)

O Supreme Person! O Lord of all beings! O God of gods! O Master of the world! Only You Yourself know who You truly are.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 16

वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः | याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि ||१०-१६||

Meaning (Hindi)

इसलिए आप ही अपनी उन दिव्य विभूतियों को पूरी तरह बता सकते हैं, जिनसे आप इन सभी लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।

Meaning (English)

So only You can fully describe Your own divine glories — those through which You pervade and sustain all these worlds.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 17

कथं विद्यामहं योगिंस्त्वां सदा परिचिन्तयन् | केषु केषु च भावेषु चिन्त्योऽसि भगवन्मया ||१०-१७||

Meaning (Hindi)

हे योगेश्वर! मैं निरंतर चिंतन करते हुए आपको कैसे जानूँ? और हे भगवन! किन-किन रूपों में मैं आपका ध्यान करूँ?

Meaning (English)

O Lord of Yoga! How can I always keep thinking of You and know You? And in what forms and aspects, O Lord, should I meditate on You?

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 18

विस्तरेणात्मनो योगं विभूतिं च जनार्दन | भूयः कथय तृप्तिर्हि शृण्वतो नास्ति मेऽमृतम् ||१०-१८||

Meaning (Hindi)

हे जनार्दन! अपनी योग शक्ति और विभूतियों को फिर से विस्तार से बताइए — क्योंकि आपकी अमृत जैसी बातें सुनते हुए मेरा मन तृप्त ही नहीं होता।

Meaning (English)

O Krishna! Please tell me again in full about Your power and divine glories — because listening to Your life-giving words, I am never satisfied.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 19

श्रीभगवानुवाच | हन्त ते कथयिष्यामि दिव्या ह्यात्मविभूतयः | प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे ||१०-१९||

Meaning (Hindi)

श्रीकृष्ण बोले — अच्छा, तो मैं तुम्हें अपनी प्रमुख दिव्य विभूतियाँ बताता हूँ। हे कुरुश्रेष्ठ! मेरे विस्तार का कोई अंत नहीं है।

Meaning (English)

Krishna said: Very well! I will tell you about My main divine glories. O best of the Kurus! There is no end to My full extent.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 20

अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः | अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ||१०-२०||

Meaning (Hindi)

हे गुडाकेश! मैं सभी जीवों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ — और मैं ही सभी जीवों का आदि, मध्य और अंत भी हूँ।

Meaning (English)

O Arjuna! I am the Self seated in the hearts of all living beings — and I am the beginning, middle and end of all beings.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 21

आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् | मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ||१०-२१||

Meaning (Hindi)

मैं आदित्यों में विष्णु हूँ, ज्योतियों में चमकता सूर्य हूँ; मरुतों में मरीचि हूँ और नक्षत्रों में चंद्रमा हूँ।

Meaning (English)

Among the Adityas I am Vishnu; among lights I am the brilliant sun; among the Maruts I am Marichi; and among stars I am the moon.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 22

वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः | इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ||१०-२२||

Meaning (Hindi)

मैं वेदों में सामवेद हूँ, देवों में इंद्र हूँ; इंद्रियों में मन हूँ और जीवों में चेतना (ज्ञानशक्ति) हूँ।

Meaning (English)

Among the Vedas I am the Sama Veda; among the gods I am Indra; among the senses I am the mind; and among living beings I am consciousness.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 23

रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् | वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ||१०-२३||

Meaning (Hindi)

मैं रुद्रों में शंकर हूँ, यक्ष-राक्षसों में कुबेर हूँ; वसुओं में अग्नि हूँ और पर्वतों में मेरु हूँ।

Meaning (English)

Among the Rudras I am Shankara; among the Yakshas and Rakshasas I am Kubera; among the Vasus I am fire; and among mountains I am Meru.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 24

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् | सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ||१०-२४||

Meaning (Hindi)

हे पार्थ! पुरोहितों में बृहस्पति मुझे जानो; मैं सेनापतियों में स्कंद हूँ और जलाशयों में समुद्र हूँ।

Meaning (English)

O Arjuna! Among the priests of kings, know Me to be Brihaspati; among army commanders I am Skanda; and among bodies of water I am the ocean.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 25

महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् | यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः ||१०-२५||

Meaning (Hindi)

मैं महर्षियों में भृगु हूँ और शब्दों में एकाक्षर ॐ हूँ; यज्ञों में जपयज्ञ हूँ और अचल चीजों में हिमालय हूँ।

Meaning (English)

Among the great sages I am Bhrigu; among words I am the single syllable Om; among sacrifices I am the silent chanting of the name; and among the immovable things I am the Himalayas.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 26

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः | गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ||१०-२६||

Meaning (Hindi)

मैं सभी वृक्षों में पीपल हूँ और देवर्षियों में नारद हूँ; गंधर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ।

Meaning (English)

Among all trees I am the peepal; among divine sages I am Narada; among the Gandharvas I am Chitraratha; and among the perfected sages I am Kapila Muni.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 27

उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् | ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ||१०-२७||

Meaning (Hindi)

घोड़ों में अमृत से उत्पन्न उच्चैश्रवा को मुझे जानो; हाथियों में ऐरावत हूँ और मनुष्यों में राजा हूँ।

Meaning (English)

Among horses, know Me to be the divine Ucchaishravas, born from nectar; among lordly elephants I am Airavata; and among humans I am the king.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 28

आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् | प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः ||१०-२८||

Meaning (Hindi)

मैं शस्त्रों में वज्र हूँ, गायों में कामधेनु हूँ; प्रजा उत्पन्न करने का कारण कामदेव मैं हूँ और सर्पों में वासुकि हूँ।

Meaning (English)

Among weapons I am the thunderbolt; among cows I am Kamadhenu, the wish-fulfilling cow; I am Kamadeva, the cause of creation; and among serpents I am Vasuki.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 29

अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम् | पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम् ||१०-२९||

Meaning (Hindi)

मैं नागों में शेषनाग हूँ और जल देवताओं में वरुण हूँ; पितरों में अर्यमा हूँ और नियंत्रण करने वालों में यम हूँ।

Meaning (English)

Among the Nagas I am Ananta (Shesha); among water deities I am Varuna; among the ancestors I am Aryama; and among those who maintain order I am Yama.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 30

प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् | मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ||१०-३०||

Meaning (Hindi)

मैं दैत्यों में प्रह्लाद हूँ और गणना करने वालों में काल हूँ; पशुओं में सिंह हूँ और पक्षियों में गरुड़ हूँ।

Meaning (English)

Among the demons I am Prahlada; among those who measure time I am Time itself; among animals I am the lion; and among birds I am Garuda.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 31

पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् | झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ||१०-३१||

Meaning (Hindi)

मैं पवित्र करने वालों में वायु हूँ और शस्त्रधारियों में राम हूँ; जलचरों में मगरमच्छ हूँ और नदियों में गंगा हूँ।

Meaning (English)

Among those who purify I am the wind; among warriors I am Rama; among water creatures I am the crocodile; and among rivers I am the Ganga.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 32

सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन | अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् ||१०-३२||

Meaning (Hindi)

हे अर्जुन! मैं ही सृष्टियों का आदि, मध्य और अंत हूँ; विद्याओं में अध्यात्म विद्या हूँ और तर्क करने वालों में तर्क (वाद) हूँ।

Meaning (English)

O Arjuna! I am the beginning, middle and end of all creation; among the sciences I am the science of the Self; and among those who debate, I am the method of reasoning.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 33

अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च | अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः ||१०-३३||

Meaning (Hindi)

मैं अक्षरों में 'अ' हूँ और समासों में द्वंद्व समास हूँ; मैं ही अक्षय काल हूँ और सभी दिशाओं में मुख वाला विराट धाता हूँ।

Meaning (English)

Among letters I am 'A'; among compound words I am the Dvandva compound; I am undying Time; and I am the all-seeing Creator who faces every direction.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 34

मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् | कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ||१०-३४||

Meaning (Hindi)

मैं सबको हर लेने वाली मृत्यु हूँ और आने वाले जीवों की उत्पत्ति का कारण हूँ; स्त्रियों के गुणों में कीर्ति, लक्ष्मी, वाणी, स्मृति, बुद्धि, धैर्य और क्षमा हूँ।

Meaning (English)

I am all-consuming Death and also the source of everything yet to come; among feminine qualities I am fame, beauty, speech, memory, intelligence, courage and forgiveness.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 35

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् | मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ||१०-३५||

Meaning (Hindi)

सामों में बृहत्साम हूँ और छंदों में गायत्री हूँ; महीनों में मार्गशीर्ष हूँ और ऋतुओं में वसंत हूँ।

Meaning (English)

Among the hymns I am the Brihatsaman; among metres I am the Gayatri; among months I am Margashirsha; and among seasons I am spring.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 36

द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् | जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ||१०-३६||

Meaning (Hindi)

मैं धोखेबाजों में जुआ हूँ और तेजस्वियों में तेज हूँ; मैं विजय हूँ, उद्यम हूँ और सात्विकों का सत्त्व भाव हूँ।

Meaning (English)

Among the deceitful I am gambling; among the brilliant I am their brilliance; I am victory; I am effort; and among the pure-natured I am their goodness.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 37

वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनञ्जयः | मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनामुशना कविः ||१०-३७||

Meaning (Hindi)

मैं वृष्णियों में वासुदेव हूँ और पांडवों में अर्जुन हूँ; मुनियों में व्यास हूँ और कवियों में उशना कवि हूँ।

Meaning (English)

Among the Vrishnis I am Vasudeva; among the Pandavas I am Arjuna; among the sages I am Vyasa; and among poets I am the poet Ushana.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 38

दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् | मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ||१०-३८||

Meaning (Hindi)

मैं दंड देने वालों में दंड हूँ और जीत चाहने वालों में नीति हूँ; गुह्यों में मौन हूँ और ज्ञानियों का ज्ञान हूँ।

Meaning (English)

Among those who punish I am the rod of punishment; among those who seek victory I am wise policy; among secrets I am silence; and among the wise I am their wisdom.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 39

यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन | न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम् ||१०-३९||

Meaning (Hindi)

हे अर्जुन! जो सभी जीवों की उत्पत्ति का बीज है, वह भी मैं ही हूँ — क्योंकि कोई भी चर या अचर जीव ऐसा नहीं जो मुझसे रहित हो।

Meaning (English)

O Arjuna! Whatever is the seed of all beings — that too is Me. There is no being, moving or unmoving, that can exist without Me.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 40

नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप | एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया ||१०-४०||

Meaning (Hindi)

हे परंतप! मेरी दिव्य विभूतियों का कोई अंत नहीं है। मैंने यह विस्तार तुम्हें बस संक्षेप में बताया है।

Meaning (English)

O Arjuna! There is no end to My divine glories. I have only given you a brief account of My main manifestations.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 41

यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा | तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसम्भवम् ||१०-४१||

Meaning (Hindi)

जो भी कोई विभूतियुक्त, कांतिमान या शक्तिसंपन्न प्राणी या वस्तु है — उसे तुम मेरे तेज के एक अंश से उत्पन्न जानो।

Meaning (English)

Whatever being is glorious, prosperous or powerful — know that it has come from just a spark of My radiance.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
श्लोक 42

अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन | विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत् ||१०-४२||

Meaning (Hindi)

या फिर हे अर्जुन! इतना सब जानकर तुम्हें क्या करना है? बस यह जानो — मैं अपने एक अंश मात्र से इस सारे जगत को धारण करके स्थित हूँ।

Meaning (English)

Or rather, O Arjuna — what need is there for you to know all this in detail? Just know this: I hold this entire world in place with just one part of Myself.

🪔
वास्तविक समय AI व्याख्या और विचार
इस श्लोक पर कृष्ण AI से पूछें
← पिछला अध्याय

राजविद्याराजगुह्ययोग

अध्याय 9

अगला अध्याय →

विश्वरूपदर्शनयोग

अध्याय 11

......
MySanatani Logo
MySanatani
Ancient Wisdom. Modern Life.

अन्वेषण

  • वॉलपेपर
  • आज
  • कृष्ण AI
  • ध्यान
  • ग्रंथ एक्सप्लोरर
  • रिपोर्ट्स
  • स्टोर

खाता और सहायता

  • लॉगिन
  • सेटिंग्स
  • प्रश्नोत्तर
  • रिफंड और रिप्लेसमेंट
  • शिपिंग और डिलीवरी
  • रद्द करने की नीति
  • व्हाट्सएप सहायता

जुड़ें

गोपनीयता·शर्तें·रिफंड·शिपिंग

गर्व से सनातनी 🪷 भारत में निर्मित

© 2026 HIRPARAS TECH ENTERPRISE. सर्वाधिकार सुरक्षित।

आज
ग्रंथ
कृष्ण AI
ध्यान
स्टोर